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10 दिन बाद भी क्यों नहीं किया ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार? बेबस पिता के दिल का दर्द सुनिए

Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा का परिवार सिर्फ इतना ही पूछना चाहता है कि क्या एक बेटी की मौत से जुड़े इन सवालों का जवाब कभी मिल पाएगा. क्या सच बिना डर, पक्षपात और प्रभाव के सामने आएगा?

10 दिन बाद भी क्यों नहीं किया ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार?  बेबस पिता के दिल का दर्द सुनिए
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में परिवार के सवाल.

नोएडा की बेटी और भोपाल की रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार आखिर कब होगा? ये सवाल पूरे देश की जुबान पर है. ट्विशा की मौत 12 मई को हुई थी. परिवार का आरोप है कि बेटी की हत्या हुई. ससुरालवाले कह रहे हैं कि उसने आत्महत्या की. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या की बात सामने आई है. भोपाल एम्स के मोर्चरी में बंद एक बेटी अपनी अंतिम विदाई का इंतजार कर रही है. आखिर ट्विशा के परिवार ने मौत के 10 दिन बाद भी उसका अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया, उनको किस बात का इंतजार है, उनके पिता ने अपना दुख खुद बताया है.

ट्विशा की मौत की स्वतंत्र जांच हो

द्विशा का परिवार बेटी का रीपोस्टमार्टम के साथ ही मामले की स्वतंत्र जांच चाहता था. बेटी के शरीर की चोटों को देखकर उनको शक था कि उसे मारा गया है, लेकिन पुलिस का कहना है कि दोबारा पोस्टमार्टम उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. ट्विशा के परिवार का कहना है कि अगर सब कुछ विधिवत और उचित था तो एक स्वतंत्र जांच से सामने आ जाएगा. अगर ऐसा नहीं था तो पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव की परवाह किए बिना उत्तरदायित्व निर्धारित होना चाहिए.

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ट्विशा की मौत के बाद सास ने किन लोगों से बात की?

पीड़ित परिवार का कहना है कि मौत के 10 दिन बाद भी बेटी का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहा है. परिवार आज भी उन सवालों का जवाब ढूंढ रहा है, जिनका समाधान किसी भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से किया जाना चाहिए. वे सिर्फ से साफ करना चाहते हैं कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह घटना के तुरंत बाद किन लोगों के संपर्क में थीं. प्रारंभिक तौर पर उनको इस बारे में कुछ भी नहीं पता चला. जो भी जानकारी मिली वह कोर्ट के सामने पेश दस्तावेजों और अलग-अलग न्यूज पेपर्स और मीडिया रिपोर्टों से मिली. इन तथ्यों ने परिवार के मन में गंभीर चिंता और कई सवाल खड़े कर दिए हैं. 

गिरिबाला सिंह ने इन पावरफुल लोगों से बात क्यों की?

ट्विशा के परिवार का कहना है कि पब्लिक डोमेन में मौजूद दस्तावेजों से उनको पता चला है कि घटना के बाद गिरिबाला सिंह ने कथित रूप से  मनोज कुमार (एडीजे), जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह (लोकायुक्त), श्री एके मिश्रा (जिला न्यायाधीश) सीसीटीवी से संबंधित रोहित विश्वकर्मा, विनोद वानी, अधिवक्ता वेनोश काल, डॉ. राजबाला भदौरया, साईबाला बघेल, मोद झारया, डॉ. यशवीर, पंकज कुशवाहा, अजेय सिंह, मनोज कुमार तसमेत तमाम प्रभावशाली और अहम पदों पर काबिज लोगों के संपर्क साधा.

परिवार नहीं जानता कि गिरिबाला ने इन लोगों से क्यों और क्या बात की. हालांकि वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहे लेकिन घटना की गंभीरता,  इन संपर्क का समय, उनकी फ्रीक्विंसी, ये सब ऐसे सवाल हैं न्याय के लिए जिनकी जांच स्वतंत्र जांच SIT या अन्य अधिकारियों से करवाई जानी चाहिए. 

सीसीटीवी की देखरेख करने वालों से तुरंत बात क्यों?

सीसीटीवी की देखरेख और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से जुड़े लोगों से गिरिबाला का बात किए जाना चिंता की बात है. किसी भी मौत की जांच में सीसीटीवी, डिजिटल रिकॉर्ड,  इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और तकनीकी सक्ष्य बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए उनकी मांग है कि ऐसे संपर्क के समय, मकसद, परिस्थितियों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जाए ताकि उनकी विश्वनीयता पर कोई शक न रहे. 

गिरिबाला सिंह कह रही हैं कि ये बातचीत शोक जताने और सांत्वना देने से संबंधित है. लेकिन वे परिवार ये जानना चाहता है कि सीसीटीवी रखरखाव और तकनीकी सेवाओं से जुड़े लोगों की भूमिका संवेदना जताने में कैसे हो सकती है. ये कोई आरोप नहीं बल्कि नेचुरल सवाल है. जिसका निष्पक्ष जवाब वे जाचं के माध्यम से चाहते हैं.

बेटी की मौत से जुड़ा हर सच जानना जरूरी

परिवार ने कहा कि न्याय की तलाश में वह ऐसी परिस्थिति में फंसे हैं कि एक तरफ बेटी के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी है और दूसरी तरफ सच जानना. इस दुख को उनके लिए शब्दों में बयान करना बहुत ही मुश्किल है. उन्होंने कहा कि ये मामले सिर्फ ट्विशा शर्मा का नहीं बल्कि हर उस बेटी और उसके परिवार का है जिसे सच जानने के लिए पुलिस, कोर्ट, अस्पताल और न्यायिक संस्थाओं के चक्कर काटने पड़ते हैं. ये बहुत ही चिंता की बात है. वे चाहते हैं कि ये केस भविष्य में हर बेटी के लिए नजीर बने, जिसे न्याय की उम्मीद में भटकना पड़ता है.

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से ट्विशा शर्मा का परिवार सिर्फ इतना ही पूछना चाहता है कि क्या एक बेटी की मौत से जुड़े इन सवालों का जवाब कभी मिल पाएगा. क्या सच बिना डर, पक्षपात और प्रभाव के सामने आएगा?

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