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भैरव बटालियन, दिव्यास्त्र बैटरी, शक्तिबाण रेजीमेंट... चीन-पाक देखेंगे सेना का दम, जानें कैसे करेगी काम

भारतीय सेना में अक्टूबर के आखिर तक 5 भैरव बटालियन, 5 दिव्यास्त्र बैटरी, 3 शक्तिबाण रेजिमेंट के साथ ही हर इंफ्रेंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून बनने की उम्‍मीद है. ये साफ तौर पर सेना की क्षमता बढ़ाने के साथ भविष्य के संभावित खतरों से निपटने की भी तैयारी है.

भैरव बटालियन, दिव्यास्त्र बैटरी, शक्तिबाण रेजीमेंट... चीन-पाक देखेंगे सेना का दम, जानें कैसे करेगी काम
भारतीयी सेना की क्षमता बढ़ाने के साथ भविष्य के संभावित खतरों से निपटने की भी तैयारी की जा रही है.
  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने आक्रामक और घातक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है.
  • अक्टूबर के अंत तक 5 भैरव बटालियन, 5 दिव्यास्त्र बैटरी, 3 शक्तिबाण रेजिमेंट और ड्रोन प्लाटून गठित होंगे.
  • रुद्र ब्रिगेड एक आत्मनिर्भर ब्रिगेड होगी जिसमें पैदल सेना, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर शामिल होंगे.
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नई दिल्‍ली :

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारतीय सेना को आक्रामक और घातक बनाने की प्रक्रिया में असरदार और दमदार काम हो रहा है. सेना की बढ़ती ताकत का सबसे ताजा उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर था, जिसमें सेना ने न सिर्फ पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया बल्कि पाकिस्तान की तरफ से किए गए हर हमले को मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्‍हें बुरी तरह  नाकाम भी किया. यह सेना के लिए जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन का स्वर्णिम दशक है. इस दिशा में सेना में बहुत तेजी से काम हो रहा है. उम्मीद है कि भारतीय सेना में अक्टूबर के आखिर तक 5 भैरव बटालियन, 5 दिव्यास्त्र बैटरी, 3 शक्तिबाण रेजिमेंट के साथ ही हर इंफ्रेंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून बन जाएगी. ये साफ तौर पर सेना की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ  भविष्य के संभावित खतरे और नई तकनीक के जोखिम भरे खतरों से निपटने की भी तैयारी है.

भैरव बटालियन आकार में छोटी है लेकिन ज्यादा घातक बटालियन साबित होगी. यह दुश्मन को चौंकाने और परेशान करने के लिए काफी होगी. इस महीने के आखिर तक भारतीय सेना में ऐसी पांच बटालियनें तैयार हो जाएंगी. ये घातक हथियारों से लैस होंगी और हाई इंटेंसिटी से लैस होकर ऑपरेशन करने में माहिर होंगी. भैरव बटालियन पैरा कमांडो से अलग होंगी क्योंकि ये बॉर्डर पर मुख्य रूप से तत्काल  और छोटे पैमाने पर ज्यादा घातक ऑपरेशन करने पर केंद्रित है. यह यंग स्पेशल फोर्सेज और इंफ्रैट्री के बीच पुल का काम भी करेगी, जिससे स्पेशल फोर्सेज को महत्वपूर्ण अभियानों से मुक्त किया जा सके. 

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स्‍थानीय युवकों को दी जाएगी प्राथमिकता 

भैरव यूनिट्स सेना के विशेष कोर से जुड़ी होगी और उन्हीं के साथ काम करेगी. भैरव कमांडो बटालियन की भर्ती में स्थानीय युवकों को प्राथमिकता दी जाएगी. सही मायने में यह तेज और घातक होगी जो अचानक और सटीक हमला के लिए हमेशा तैयार होगी. इसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं  पर तैनात किया जाएगा. 

आत्मनिर्भर ब्रिगेड होगी रुद्र ब्रिगेड

दूसरी तरफ सेना की ब्रिगेड का भी पुनर्गठन किया जा रहा है. सेना में आम तौर पर एक ब्रिगेड तीन बटालियन से मिलकर बनती है. रुद्र ब्रिगेड एक आत्मनिर्भर ब्रिगेड होगी जो किसी भी भौगलिक सीमा में बंधी नही होगी. यह हर प्रकार की भूमिका में दुश्मन से लड़ेगी. रुद्र ब्रिगेड में सभी कॉम्बेट आर्म्स होंगे, जैसे पैदल सेना, एयर डिफेंस, इलेक्‍ट्रॉनिक वॉरफेयर के साथ सर्पोट आर्म्स भी होगा. 

हर इंफ्रेंट्री बटालियन में होगी ड्रोन प्‍लाटून 

ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने भारतीय सेना द्वारा ड्रोन और एंटी ड्रोन का खूब इस्तेमाल देखा. पाकिस्तान की तरफ से जब बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे गए तो भारतीय सेना ने उन्हें मार गिराया. अब भारतीय सेना की हर इंफ्रेंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून होगी. अभी भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके लिए सैनिकों को लगातार ट्रेनिंग भी दी जा रही है. हालांकि अब ड्रोन  की डेडिकेटेड प्लाटून होगी, जो अक्टूबर महीने के आखिर तक तैयार हो जाएगी. 

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दिव्‍यास्‍त्र बैटरी से बढ़ेगी तोपखाने की ताकत 

भारतीय सेना की आर्टिलरी  रेजिमेंट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एलओसी पर पाकिस्तान की कई पोस्ट और आतंकियों के लॉन्च पैड नष्ट किए थे. तोपखाने की ताकत बढ़ाने के लिए जल्द ही 5 आर्टिलरी रेजिमेंट में एक-एक दिव्यास्त्र बैटरी बन जाएगी और तीन शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट भी तैयार हो जाएगी. इस रेजिमेंट को पाकिस्तान से लगी सीमा पर तैनात किया जाएगा. 

दिव्यास्त्र बैटरी आर्टिलरी की हर रेजिमेंट में बनेगी. पहले फेज में जिन पांच रेजिमेंट में यह बन रही हैं, वे सेना की सेंट्रल कमांड को छोड़कर अलग-अलग कमांड में होगी. शक्तिबाण रेजिमेंट डेडिकेटेड ड्रोन और लॉइटरिंग (टारगेट के ऊपर मंडराकर सटीक अटैक करने वाले) एम्युनिशन की रेजिमेंट होगी. दिव्यास्त्र बैटरी में ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन होंगे. यह सब मिलकर जब दुश्मन पर टूट पड़ेंगे तो उसका बच पाना निश्चित रूप से  नामुमकिन होगा. 

सेना की मारक क्षमता में होगा इजाफा 

इससे सेना की मारक क्षमता और कांउटर ड्रोन क्षमता में जबरदस्त  इजाफा होगा. इसी साल करगिल विजय दिवस के मौके पर सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भैरव बटालियन ,रुद्र ब्रिगेड, शक्तिबाण तोपखाना और दिव्यास्त्र जैसे बटालियनों का ऐलान किया था. 

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