- कोलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज इंद्रजीत चटर्जी ने SIR ट्राइब्यूनल के अध्यक्ष पद से इस्तीफे का प्रस्ताव रखा है
- चटर्जी ने यात्रा दूरी और ट्रैफिक की समस्याओं के कारण ट्राइब्यूनल का दफ्तर छोड़ने की इच्छा जताई है
- उन्होंने वर्क फ्रॉम होम या कार्यालय स्थान के नजदीक होने की शर्त पर काम जारी रखने की बात कही है
बंगाल में SIR प्रक्रिया की निगरानी के लिए बने ट्राइब्यूनल में शामिल जज ने इस्तीफे का ऑफर दिया है. कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज इंद्रजीत चटर्जी ने ट्राइब्यूनल के हेड के पद से इस्तीफे का प्रस्ताव रखा है. उनका कहना है कि ट्राइब्यूनल का दफ्तर दूर है और हर दिन करीब 60 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है. ऐसे में उनके लिए इतनी यात्रा करके आना और जाना संभव नहीं है. हालांकि उनका यह भी कहना है कि यदि उन्हें वर्क फ्रॉम होम का मौका मिले या फिर दफ्तर उनके घर के पास ही आ जाए तो फिर वह काम जारी रख सकते हैं. वह मुर्शिदाबाद जिले में SIR ट्राइब्यूनल के अध्यक्ष हैं. इस जिले में 4.5 लाख वोटर्स के नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के नाम पर हटाए गए हैं.
इंद्रजीत चटर्जी की आयु 70 वर्ष से अधिक है. उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा, 'मेरी चिंता यह है कि मेरे सॉल्ट लेक स्थित आवास से दक्षिण 24 परगना जिले के जोका तक की दूरी 27 किलोमीटर है, जहां ऑफिस है. खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम के चलते यह रास्ता तय करने में मुश्किल आती है.' चटर्जी ने यह लेटर कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजा है. इसमें उनका कहना है कि मैं ट्राइब्यूनल के हेड के पद से इस्तीफा देना चाहता हूं. मेरी इच्छा है कि यह जिम्मेदारी 2 नवंबर से वापस ले ली जाए. उन्होंने कहा कि मैंने विकल्प की भी बात की है कि या तो मुझे वर्क फ्रॉम होम का मौका मिले या फिर दफ्तर मेरे घर से 10 या 12 किलोमीटर की दूरी पर ही हो.
जज इंद्रजीत चटर्जी ने यह पत्र ईमेल और पोस्टपेड के जरिए भेजा है. इस संबंध में उन्होंने अगले तीन सप्ताह में चीफ जस्टिस से जवाब की अपील की है. इलेक्शन कमिशन ने बंगाल में SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए 19 ट्राइब्यूनल गठित किए हैं. जस्टिस इद्रजीत चटर्जी कोलकाता हाई कोर्ट से 2017 में रिटायर हुए थे. 62 साल की आयु में वह रिटायर हुए थे और अब 70 साल से ज्यादा की उम्र है.
बता दें कि इससे पहले भी हाई कोर्ट के एक पूर्व जज टीएस सिवागनानम ने भी इस्तीफे का ऐलान किया था. पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान कुल 27.16 लाख वोटर्स के नाम हटाए गए थे. इनमें से 22 लाख लोगों ने अपने नाम जोड़ने के लिए अपील की थी. इन्ही अपीलों पर सुनवाई के लिए ट्राइब्यूनलों का गठन किया गया है.
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