- मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने नौ घंटे तक बंधक बनाकर पुलिस कार्रवाई को मजबूर किया गया था.
- AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम को इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए गिरफ्तार किया गया.
- साथ ही ISF के मौलाना शाहजहां अली समेत कई लोगों को अधिकारियों के घेराव के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाए जाने की घटना ने अब गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया है. इस मामले में जहां एक ओर All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के नेता मोफक्करुल इस्लाम की गिरफ्तारी हुई है, वहीं दूसरी ओर Indian Secular Front के नेताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है. पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने इस पूरे मामले में संभावित राजनीतिक नेटवर्क और संगठित विरोध की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है.
7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने 9 घंटे तक बनाया था बंधक
मालदा के कालियाचक इलाके में बुधवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को उग्र भीड़ ने घेरकर करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा. अधिकारियों को देर रात पुलिस बल की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन इस दौरान पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं.
मुख्य साजिशकर्ता के रूप में AIMIM नेता मोफक्करुल गिरफ्तार
इस पूरे घटनाक्रम में बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस ने AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम को “मुख्य साजिशकर्ता” बताते हुए गिरफ्तार किया. उन्हें बागडोगरा एयरपोर्ट से उस समय पकड़ा गया जब वे राज्य से बाहर जाने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस के अनुसार, इस्लाम ने ही विरोध प्रदर्शन को संगठित किया और भीड़ को उकसाने में अहम भूमिका निभाई.
ISF के मौलाना शाहजहां अली सहित कई लोग गिरफ्तार
इसी बीच, इस मामले में ISF कनेक्शन भी सामने आया है. पुलिस ने ISF से जुड़े नेता मौलाना शाहजहां अली सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर हिंसा और न्यायिक अधिकारियों के घेराव में शामिल होने का आरोप है. इससे यह संकेत मिलता है कि विरोध प्रदर्शन केवल स्वतःस्फूर्त नहीं था, बल्कि इसमें विभिन्न संगठनों की सक्रिय भूमिका हो सकती है.

प्रदर्शनकारियों का दावा- वैध वोटरों का नाम हटाया जा रहा
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ बंगाल SIR प्रक्रिया को लेकर उठे असंतोष में है. चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और लाखों नाम “अडजुडिकेशन” में डालने के बाद कई इलाकों में विरोध तेज हो गया था. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनावी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन को लगाई थी फटकार
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने राज्य प्रशासन को फटकार लगाते हुए इसे “गंभीर विफलता” करार दिया और जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया. साथ ही, अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
AIMIM और ISF की भूमिका से मामला संवेदनशील
राजनीतिक तौर पर यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है. जहां सत्तारूढ़ दल इस घटना को बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप और साजिश से जोड़ रहा है, वहीं विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और जन आक्रोश बता रहा है. AIMIM और ISF की कथित भूमिका ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या यह केवल विरोध था या सुनियोजित राजनीतिक रणनीति.
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