- बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है
- याचिका में कहा गया है कि नियमों के अनुसार चेयरमैन का कार्यकाल अधिकतम दो वर्ष तक ही सीमित होता है
- अप्रैल 2025 की अधिसूचना में मिश्रा का कार्यकाल पांच वर्ष तक बढ़ाने को गैरकानूनी बताया गया है
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा फिर से चर्चा में हैं. उनके कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और उन्हें हटाने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट की वकील योगमाया एमजी ने याचिका दायर कर मिश्रा को चेयरमैन पद से हटाने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है. याचिका में दावा किया गया है कि BCI नियम के तहत चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का कार्यकाल दो वर्ष तक सीमित है. जबकि उनके कार्यकाल को ज्यादा समय हो गया है. ऐसे में उन्हें हटाकर स्वतंत्र तरीके से चुनाव करवाया जाए और नई नियुक्ति की जाए.
क्या है मनन मिश्रा से जुड़ा मामला
याचिकाकर्ता ने अप्रैल 2025 में जारी उस गजट अधिसूचना को भी चुनौती दी है, जिसमें मिश्रा का कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक दर्ज किया गया है. याचिका के मुताबिक महज प्रशासनिक अधिसूचना के जरिए नियमों में निर्धारित कार्यकाल को पांच साल तक नहीं बढ़ाया जा सकता. इसमें सुप्रीम कोर्ट से मिश्रा और BCI के वाइस चेयरमैन का कार्यकाल समाप्त करने तथा स्वतंत्र निगरानी में समयबद्ध तरीके से नए चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की गई है. साथ ही चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के पद पर अधिकतम कार्यकाल निर्धारित करने, कूलिंग-ऑफ अवधि लागू करने और विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों के बीच पद का रोटेशन सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है.
ये भी पढे़ंः जो आप चाह रहे, वहीं हम चाह रहे, हमारे बीच टकराव नहीं, अभिजीत दीपके से बातचीत पर BCI चेयरमैन मनन मिश्रा
वित्तीय गतिविधियों की जांच की भी मांग
याचिका में BCI से जुड़े PEARL-FIRST ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय गतिविधियों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है. इसके लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश या पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है. समिति में CAG की तरफ से नामित ऑडिटर और वित्तीय एवं तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है. इसके अलावा ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन से प्राप्त शुल्क, BCI के वैधानिक फंड, संस्थागत आय, ट्रस्ट के वित्त, विक्रेता अनुबंधों और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन का समयबद्ध ऑडिट कराने की मांग भी याचिका में की गई है.
याचिकाकर्ता ने AIBE शुल्क से जुड़े बैंक खातों, उनके नियंत्रण और खर्च की मंजूरी तथा ऑडिटेड वित्तीय विवरणों की भी जांच की मांग उठाई है. याचिका में कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट मिश्रा को पद से हटाने का आदेश देता है तो BCI के कामकाज में प्रशासनिक शून्य न पैदा हो. इसके लिए अंतरिम तौर पर एक स्वतंत्र प्रशासनिक समिति गठित कर BCI के कामकाज का संचालन कराने का निर्देश देने की मांग की गई है.
ये भी पढ़ेंः बार काउंसिल चेयरमैन ने NALSAR के छात्रों से मांगी माफी, चीफ जस्टिस ने भी लगाई थी फटकार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं