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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाथ जोड़कर बोले- भगवान कृष्ण पर भाव में बोल गया, हमसे चूक हो जाती है

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बृज के एक संत हुए, वे कहते थे कि राम जी तो मिट्टी की मूर्ति हैं. क्या वे मिट्टी की मूर्ति हैं. भाव में हमने कहा था. फिर भी हमारी भावना ऐसी नहीं थी. हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं. इस दौरान वह हाथ जोड़कर माफी मांगने की मुद्रा में भी नजर आए.'

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाथ जोड़कर बोले- भगवान कृष्ण पर भाव में बोल गया, हमसे चूक हो जाती है
  • धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण की तुलना करते हुए राम का नाम सरल और कृष्ण का नाम टेढ़ा बताया था
  • उनकी कथन पर विवाद हुआ और सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया, जिसके बाद उन्होंने सफाई दी है
  • शास्त्री ने कहा कि उनकी बात भाव में कही गई थी और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था
नई दिल्ली:

बाबा बागेश्वर के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक कथा में भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए कुछ बातें कही थीं. इसे लेकर विवाद हुआ तो अब उन्होंने सफाई भी दी है. उनका कहना है कि मैंने भाव में काफी कुछ कह दिया था, लेकिन मेरा ऐसा विचार नहीं था. मैं भगवान कृष्ण का विरोधी नहीं हूं. वह हाथ जोड़कर कहते दिखे कि मेरी बातों का अनर्थ न लगाया जाए. फिर भी मैंने जो कहा, वह गलत था. ऐसा नहीं कहना चाहिए था. दरअसल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि भगवान राम का नाम एकदम सीधा है, कृष्ण का टेढ़ा है. अयोध्या का नाम कितना सरल और सीधा है, जबकि वृंदावन का नाम टेढ़ा है. एक गीत भी उन्होंने गया था, जिसके बोल थे- 'बांसुरी का बजाना खेल भी है, पर धनुष चलाना खेल नहीं'. 

इसको लेकर विवाद हुआ और सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग उन्हें ट्रोल करने लगे. इसी पर अब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी बात को चूक बताया है. उन्होंने कहा, 'एक बात बोलें. कभी-कभी विनोद में हम कुछ भी कह जाते हैं. उसका अर्थ का अनर्थ न लगाया जाए. हमसे चूक तो हो जाती है. कभी जोश में बोल जाते हैं और कभी भाव में बोल जाते हैं. अभी हमने एक कथा में कह दिया कि कृष्ण जी तो टेढ़े हैं, राम जी तो सीधे हैं तो क्या गलत कहा. ठाकुर जी तो टेढ़े हैं ही न. हमने भाव में कहा था. हमारे नाम में भी कृष्ण है. जिससे ज्यादा प्रेम है, उससे ऐसी बात कही जाती है.'

पढ़ें: बांसुरी बजाना तो खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं; राम और कृष्ण पर मजाक में क्या बोल गए धीरेंद्र शास्त्री

उन्होंने महाकवि सूरदास का उदाहरण भी दिया. शास्त्री ने कहा, 'सूरदास कहते हैं कि आज हरि देखे नंगम. यह भाव है. सखियां भी कितना विनोद करती हैं. भ्रमर गीत में गोपियों ने कितना विनोद किया है. वे भंवरे को देखकर कहती हैं कि अरे तू भी वैसा ही है काला-कलूटा. यह कहिए कि जग में सुंदर हैं दो नाम. आज कल भारत में नया ट्रेंड चला है. फेमस होना है तो बाबा बागेश्वर का विरोध करो. फेमस होने के लिए लोग लपेट लेते हैं.' 

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बृज के एक संत हुए, वे कहते थे कि राम जी तो मिट्टी की मूर्ति हैं. क्या वे मिट्टी की मूर्ति हैं. भाव में हमने कहा था. फिर भी हमारी भावना ऐसी नहीं थी. हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं. इस दौरान वह हाथ जोड़कर माफी मांगने की मुद्रा में भी नजर आए.'

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