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राम मंदिर चढ़ावा की जांच अदालत की निगरानी में हो मीलॉर्ड! सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया मामला

राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राम मंदिर जैसे स्थान राष्ट्रीय महत्व रखते हैं. ऐसी स्थिति में यहां किए जाने वाले दान की गिनती और उसे रखने की एक पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए.

राम मंदिर चढ़ावा की जांच अदालत की निगरानी में हो मीलॉर्ड! सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया मामला
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
  • राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी के आरोपों की जांच अदालत की निगरानी में कराए जाने की मांग वाली याचिका SC में दाखिल
  • मंदिर को कितना चंदा मिला और उसे किस तरह से कहां जमा किया गया, इसकी फॉरेंसिक जांच हो
  • डोनेशन से जुड़े सारे रिकॉर्ड्स सुरक्षित रखने चाहिए, जांच में ये चीजें ही दस्तावेज का काम करेंगी
नई दिल्ली:

राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी के आरोपों की जांच अदालत की निगरानी में कराए जाने की मांग वाली एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है. मंदिर को कितना चंदा मिला और उसे किस तरह से कहां जमा किया गया, इसकी फॉरेंसिक जांच की मांग याचिका में की गई है. ये याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की तरफ से दायर की गई है. उनका कहना है कि डोनेशन से जुड़े सारे रिकॉर्ड्स सुरक्षित रखने चाहिए. जांच में ये चीजें ही दस्तावेज का काम करेंगी. उन्होंने मांग की है कि सभी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया जाए, पारदर्शी जांच के लिए यह जरूरी होगा.

चढ़ावे की गिनती और रखने में पारदर्शिता की जरूरत

याचिका में कहा गया कि भगवान के नाम पर मिलने वाला चंदा या चढ़ावा ट्रस्ट की संपत्ति है. ऐसे में जो भी चढ़ावा आता है, उसकी गिनती करने और रखने में पारदर्शिता की बहुत जरूरत है. श्री राम जन्मभूमि मंदिर में जो भी चढ़ावा पहुंचा है, उसकी डिटेल और संबंधित क्षेत्र की सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने की जरूरत है. याची ने यह भी मांग की है कि SIT की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में दी जानी चाहिए. इसके अलावा एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट होना चाहिए. इससे यह पता चल सकेगा कि आखिर ट्रस्ट को कितनी चीजें कहां से मिलीं और क्या-क्या दान रिसीव हुआ.

अनियमितताएं हुई हैं, सही व्यवस्था की जरूरत

याची वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मांग की है कि राम मंदिर जैसे स्थान राष्ट्रीय महत्व रखते हैं. ऐसी स्थिति में यहां किए जाने वाले दान की गिनती और उसे रखने की एक पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए और उसके लिए सभी जरूरी मानक तय होने चाहिए. याचिका में कहा गया कि जो प्रकरण फिलहाल चल रहा है, उससे स्पष्ट है कि कुछ अनियमितताएं हुई हैं और एक सही व्यवस्था की जरूरत है. अब तक इस मामले में एसआईटी ने ट्रस्ट के सदस्यों से पूछताछ की है. इसके अलावा राम मंदिर की व्यवस्था में लगे टिन्नू यादव जैसे कुछ लोगों से पूछताछ की है. एसआईटी की ओर से ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों और डोनेशन अकाउंट्स की भी जांच की गई है.

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इनपुट-IANS
 

लेखक के बारे में
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श्वेता गुप्ता
चीफ़ सब-एडिटर
उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर कासगंज से निकलकर जयपुर की एमिटी यूनिवर्सिटी से पत्रिकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. पिछले 12 सालों से बतौर पत्रकार काम कर... और पढ़ें
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