असम: सरकारी नीतियों की आलोचना करने पर गिरफ्तार हुए एसोसिएट प्रोफेसर को मिली जमानत

अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के ईमेल के आधार पर उनके खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था और करीब 18 घंटे की पूछताछ के बाद शनिवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

असम: सरकारी नीतियों की आलोचना करने पर गिरफ्तार हुए एसोसिएट प्रोफेसर को मिली जमानत

आरोपी ने जमानत के लिए अर्जी दायर की और शनिवार देर शाम जमानत प्रदान कर दी गई.

हैलाकांडी:

असम के हैलाकांडी जिले के कॉलेज के उस एसोसिएट प्रोफेसर को एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी है. जिन्हें सरकारी नीतियों की आलोचना करते हुए अधिकारियों को कथित रूप से ईमेल भेजने और मुख्यमंत्री के खिलाफ असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. यह जानकारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने रविवार को दी. अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के ईमेल के आधार पर उनके खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था और करीब 18 घंटे की पूछताछ के बाद शनिवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

अधिकारी ने कहा, ‘‘आरोपी ने जमानत के लिए अर्जी दायर की और शनिवार देर शाम जमानत प्रदान कर दी गई.'' अधिकारी ने कहा कि उन्होंने हैलाकांडी के पुलिस अधीक्षक सहित कई सरकारी अधिकारियों को ईमेल भेजे थे, ‘‘जो बेहद द्वेषपूर्ण और सांप्रदायिक प्रकृति के थे.

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उन्होंने कहा कि एसोसिएट प्रोफेसर पर विभाजनकारी माहौल बनाने के उद्देश्य से अन्य धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने का प्रयास करने का आरोप है। उन्होंने कहा कि उन पर सरकारी नीतियों की आलोचना करने के लिए अपने नाबालिग बेटे के नाम का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘ईमेल में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और शिक्षा मंत्री रनोज पेगू सहित असम सरकार के विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ अभद्र भाषा और अत्यधिक आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने ईमेल में, शैक्षिक प्रणाली की आलोचना की और खुद द्वारा लिखी गई एक पुस्तक को बढ़ावा देने की कोशिश की, जो मुख्य रूप से इस्लामी आस्था पर आधारित है.''

वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि यह 'धार्मिक भावनाओं को आहत करने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा था और विभाजनकारी माहौल बनाने के उद्देश्य से अन्य धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने का प्रयास'' था.

अधिकारी ने कहा कि उन्होंने कथित तौर पर अपने बच्चे के नाम का इस्तेमाल किया, जो चौथी कक्षा में पढ़ता है और सरकारी स्कूलों के मूल्यांकन करने के लिए सरकारी कार्यक्रम ‘गुणोत्सव' के खिलाफ एक आपत्तिजनक अर्जी दी.

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