IIT Madras Cyber Crime Study: पढ़े-लिखे और खुद को तकनीकी रूप से समझदार मानने वाले लोग ही साइबर फ्रॉड का ज्यादा शिकार हो रहे हैं. IIT मद्रास की स्टडी में ये बड़ा खुलासा हुआ है. इसमें बताया गया है कि साइबर क्राइम का शिकार होने वालों में ज्यादातर एजुकेटेड प्रोफेशनल्स शामिल हैं. इस लिस्ट में शामिल पेशेवर लोगों में डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर और आईटी प्रोफेशनल्स हैं. स्टडी में कहा गया है कि ये सभी डिजिटली काफी अवेयर हैं, लेकिन इसके बावजूद वो साइबर क्रिमिनल्स के बिछाए जाल में आसानी से फंस जाते हैं.
इन चीजों से लगता है डर
साइबर ठग इन पढ़े-लिखे लोगों को ठगने के लिए काफी आम तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें फर्जी लीगल नोटिस, डिजिटल अरेस्ट और पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने जैसे मामले सबसे ज्यादा हैं. इसके अलावा घर बैठे कमाई के झूठे वादे करके लालच दिया जाता है और फिर बैंक खाते पर हाथ साफ हो जाता है. कुछ लोग फर्जी ऐप्स और एपीके फाइल्स का शिकार भी होते हैं.
क्या है फंसने की असली वजह?
आईआईटी मद्रास की स्टडी में बताया गया है कि इस झांसे में फंसने की सबसे बड़ी वजह मनोवैज्ञानिक दबाव और डर है. साइबर अपराधी सीधे बैंक सिस्टम को हैक करने के बजाय शिकार के मन में डर, अर्जेंसी और अधिक रिटर्न का लालच पैदा करते हैं. इस मनोवैज्ञानिक दबाव के चलते पढ़े-लिखे लोग भी बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर देते हैं या फिर झांसे में आ जाते हैं.
साइबर क्राइम का शिकार होने पर क्या करें?
अगर आप या फिर आपका कोई अपना साइबर फ्रॉड का शिकार होता है तो तुरंत इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें. इसके अलावा cybercrime.gov.in पर मेल भी कर सकते हैं. कॉल पर अगर कोई खुद को पुलिस या फिर सीबीआई अधिकारी बताता है तो उससे बात बिल्कुल न करें और इसकी शिकायत तुरंत पुलिस में करें.
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