- असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा पवन खेड़ा को दी गई ट्रांजिट अग्रिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
- सुप्रीम कोर्ट की बेंच 15 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगी और आगे की कार्रवाई तय करेगी
- ट्रांजिट अग्रिम जमानत पवन खेड़ा को असम में दर्ज एक केस के सिलसिले में दी गई थी, जो हिमंत की पत्नी से जुड़ा है
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े मामले में असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा पवन खेड़ा को दी गई ट्रांजिट अग्रिम जमानत के फैसले को चुनौती दी है. इस मामले की सुनवाई बुधवार, 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच करेगी. असम सरकार की ओर से दाखिल याचिका में तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत प्रदान की गई थी.
ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर आपत्ति
यह जमानत असम में दर्ज एक केस के सिलसिले में दी गई थी, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा हुआ है. सोमवार को असम सरकार की ओर से मुख्य न्यायाधीश की बेंच के समक्ष मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई थी. असम सरकार की तरफ से पेश वकील ने अदालत से अनुरोध किया था कि इस याचिका पर बुधवार को ही सुनवाई की जाए. असम सरकार का कहना है कि तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट अग्रिम जमानत को लेकर उसकी ओर से गंभीर आपत्तियां हैं.
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तेलंगाना हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संबंधित बेंच बुधवार को सुनवाई करेगी, जिसके बाद आगे की दिशा तय होगी. आपको बता दें कि तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, ताकि वह असम पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के संबंध में नियमित जमानत के लिए सक्षम अदालत से संपर्क कर सकें. जस्टिस के सुजाना की सिंगल-जज बेंच ने निर्देश दिया था कि अगर कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें एक हफ्ते के लिए अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए.
एफआईआर और पक्षकारों की दलीलें
खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जब असम पुलिस ने उन पर रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने के मामले में केस दर्ज किया था. तेलंगाना हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान खेड़ा की तरफ से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और कांग्रेस नेता को असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर सवाल उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है.
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