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असम ने नशीले पदार्थों के खिलाफ तेज की लड़ाई, 472 करोड़ के ड्रग्स किए गए नष्ट

हिमंता ने कहा कि असम में आने वाले अधिकांश नशीले पदार्थ म्यांमार से आते हैं और मिजोरम तथा मणिपुर के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में तस्करी करके पहुंचाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि कई तस्करों और वाहकों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

असम ने नशीले पदार्थों के खिलाफ तेज की लड़ाई, 472 करोड़ के ड्रग्स किए गए नष्ट
गुवाहाटी:

असम ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर दी है. राज्य में चलाए गए सबसे बड़े नशा-विरोधी अभियानों में से एक में, रविवार को 472 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जब्त की गई दवाओं को नष्ट कर दिया गया. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि आने वाले दिनों में नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ अभियान और भी मजबूत होगा.

नशीली दवाओं के खतरे पर बड़ी कार्रवाई करते हुए, असम सरकार ने गुवाहाटी के बाहरी इलाके में आयोजित राज्य स्तरीय नशा-विरोधी कार्यक्रम में 472.51 करोड़ रुपये मूल्य की जब्त की गई दवाओं को केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हाई टेंपरेचर वाले भट्टी का उपयोग कर नष्ट किया गया.

अधिकारियों ने बताया कि नष्ट करने की प्रक्रिया पर्यावरण के अनुकूल है और जब्त किए गए नशीले पदार्थों के बाकी भंडार को नष्ट करने के लिए ये अगले आठ से नौ दिनों तक जारी रहेगी. नष्ट किए गए प्रतिबंधित पदार्थों में मॉर्फिन, अफीम, हेरोइन, कोकीन, 19 लाख से अधिक याबा टैबलेट, 2.29 लाख से अधिक कफ सिरप की बोतलें, लगभग 38,000 किलोग्राम गांजा और अफीम का भूसा शामिल था.
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सरकार के अनुसार, नष्ट किए गए सभी नशीले पदार्थ असम भर में विभिन्न मामलों में जब्त किए गए थे और अदालतों से अनुमति मिलने के बाद ही इसे नष्ट किया गया.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असम के नशा-विरोधी अभियान को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल है. उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 3,300 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, क्योंकि पुलिस राज्य भर में सक्रिय नशीले पदार्थों के गिरोहों को लगातार निशाना बना रही है.

सीएम ने कहा कि असम में आने वाले अधिकांश नशीले पदार्थ म्यांमार से आते हैं और मिजोरम तथा मणिपुर के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में तस्करी करके पहुंचाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि कई तस्करों और वाहकों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि उनमें से कई भारत की सीमाओं के बाहर से काम करते हैं.
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हिमंता ने यह भी कहा कि तस्कर पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं. उन्होंने हाल के उन मामलों का उदाहरण दिया जिनमें नकली प्लास्टर और कोकीन छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली छोटी बोतलों में नशीले पदार्थ छिपाए गए थे.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खुफिया जानकारी जुटाना, आधुनिक तकनीक और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र म्यांमार के साथ मिलकर काम कर रहा है और सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए मिजोरम और मणिपुर की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है.

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