असम ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर दी है. राज्य में चलाए गए सबसे बड़े नशा-विरोधी अभियानों में से एक में, रविवार को 472 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जब्त की गई दवाओं को नष्ट कर दिया गया. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि आने वाले दिनों में नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ अभियान और भी मजबूत होगा.
नशीली दवाओं के खतरे पर बड़ी कार्रवाई करते हुए, असम सरकार ने गुवाहाटी के बाहरी इलाके में आयोजित राज्य स्तरीय नशा-विरोधी कार्यक्रम में 472.51 करोड़ रुपये मूल्य की जब्त की गई दवाओं को केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हाई टेंपरेचर वाले भट्टी का उपयोग कर नष्ट किया गया.

सरकार के अनुसार, नष्ट किए गए सभी नशीले पदार्थ असम भर में विभिन्न मामलों में जब्त किए गए थे और अदालतों से अनुमति मिलने के बाद ही इसे नष्ट किया गया.
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असम के नशा-विरोधी अभियान को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल है. उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 3,300 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, क्योंकि पुलिस राज्य भर में सक्रिय नशीले पदार्थों के गिरोहों को लगातार निशाना बना रही है.

हिमंता ने यह भी कहा कि तस्कर पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं. उन्होंने हाल के उन मामलों का उदाहरण दिया जिनमें नकली प्लास्टर और कोकीन छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली छोटी बोतलों में नशीले पदार्थ छिपाए गए थे.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खुफिया जानकारी जुटाना, आधुनिक तकनीक और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र म्यांमार के साथ मिलकर काम कर रहा है और सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए मिजोरम और मणिपुर की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है.
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