राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने और 'घर-वापसी' संबंधी हालिया बयान के बाद मौलाना मदनी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. जमीयत उलमा-ए-हिंद के नेता अरशद मदनी ने भागवत के विचारों पर कहा कि देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है. ऐसी सोच संविधान और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ है. मदनी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने 'घर वापसी' जैसे मुद्दों पर चिंता जताई. मदनी ने कहा कि जो बातें सत्तर साल में नहीं हुईं, वो अब कही जा रही है, आज बीस करोड़ मुसलमानों की घर वापसी की बात कही जा रही है.
'मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे'
उन्होंने आरोप लगाया कि देश के भीतर नफरत की आग भड़काई जा रही है और हिंसा तथा लिंचिंग जैसी घटनाओं से माहौल खराब हो रहा है. उनके मुताबिक, किसी भी धर्म के नाम पर हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती और सभी धर्म मानवता, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे और देश में शांति व भाईचारा केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है.
जो बातें सत्तर वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि बीस करोड़ मुसलमानों की “घर वापसी” कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी माँ का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं। जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज़ जो देश को तबाही, बर्बादी,… pic.twitter.com/OYJQySAVLx
— Arshad Madani (@ArshadMadani007) February 18, 2026
'मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए'
मदनी ने कहा, 'जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाली सोच की कड़ी विरोधी रही है और जब तक जिंदा रहेगी, इसका विरोध करती रहेगी. मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे; मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा. और इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है. याद रखिए धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती. सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, इसलिए जो लोग धर्म का उपयोग नफरत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते. हमें हर स्तर पर ऐसे लोगों की निंदा और विरोध करना चाहिए.'
संघ प्रमुख ने कहा था- घर वापसी के प्रयास तेज हों
दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक सामाजिक सद्भाव बैठक में हिंदू समाज के संगठित और सशक्त होने की जरूरत पर जोर दिया था. उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए और वैज्ञानिकों के हवाले से तर्क दिया था कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह भविष्य में खत्म हो सकता है. भागवत ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या, मतांतरण और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर चिंता जताते हुए 'घर वापसी' के प्रयास तेज करने की बात भी कही थी.
भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा था कि समाज में भेदभाव खत्म करने के लिए सद्भाव जरूरी है और हम सभी एक देश और एक मातृभूमि की संतानें हैं. उन्होंने घुसपैठ के मुद्दे पर सख्ती की जरूरत बताते हुए कहा था कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं