- इसी महीने की 28 तारीख से महाराष्ट्र में जबरन धर्म परिवर्तन रोकने वाला नया कानून लागू होने जा रहा है.
- इसका निशाना जबरन या गलत तरीके से कराया जाने वाला धर्म परिवर्तन है. इसमें पुलिस बगैर वारंट गिरफ्तार कर सकती है.
- हालांकि धर्म परिवर्तन प्रतिबंधित नहीं है, पर इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 60 दिन पहले नोटिस देना होगा.
महाराष्ट्र में जबरन धर्म परिवर्तन रोकने वाला नया कानून 28 अगस्त से लागू होने जा रहा है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद जबरन, धोखे, लालच, दबाव या किसी दूसरे गलत तरीके से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है. लेकिन कानून लागू होने से पहले ही मुंबई और आसपास के इलाकों में इसका असर दिखाई देने लगा है. खासकर वसई, विरार, मीरा-भायंदर, पालघर और ठाणे के कुछ इलाकों में ईसाई प्रार्थना सभाओं में आने वाले लोगों से एक फॉर्म भरवाया जा रहा है. इसमें उनसे लिखवाया जा रहा है कि वे अपनी मर्जी से प्रार्थना में शामिल हो रहे हैं और उन पर किसी तरह का दबाव, लालच, धमकी या प्रलोभन नहीं है. यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है.
हालांकि यह फॉर्म कानूनी तौर पर अनिवार्य नहीं किया गया है. चर्च और प्रार्थना सभा के आयोजक इसे अपनी तरफ से एक तरह की सावधानी और कानूनी सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. तो आखिर नए कानून को लेकर इतनी सावधानी क्यों बरती जा रही है? कानून में क्या प्रावधान हैं? और क्या अपनी इच्छा से धर्म बदलना भी अब अपराध होगा? इन सवालों को आसान भाषा में समझते हैं.

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चर्चों में फॉर्म क्यों भरवाया जा रहा है?
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के कुछ इलाकों में रविवार की प्रार्थना सभाओं में कथित तौर पर व्यवधान और विरोध की घटनाएं हुई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई के बीच प्रार्थना सभाओं से जुड़ी पांच घटनाओं में 9 एफआईआर दर्ज की गईं. इनमें से सात प्रार्थना सभाओं के आयोजकों और वहां मौजूद लोगों के खिलाफ थीं, जबकि दो मामले कथित तौर पर सभा में व्यवधान डालने वालों के खिलाफ दर्ज किए गए. इस माहौल के बीच चर्च ने फॉर्म भरवाने का रास्ता अपनाया.
फॉर्म में आम तौर पर यह घोषणा होती है कि व्यक्ति अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में आया है. उस पर धर्म बदलने के लिए कोई दबाव, लालच, धमकी, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव नहीं है. कुछ फॉर्म में पासपोर्ट साइज फोटो के साथ आधार या पैन जैसी पहचान संबंधी जानकारी भी मांगी जा रही है. चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सरकारी आदेश नहीं है. इसे वे अपनी सुरक्षा के लिए सावधानी के तौर पर कर रहे हैं.

महाराष्ट्र का नया कानून कहता क्या है?
इस कानून का आधिकारिक नाम महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 (महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट) है.
इसमें धर्म परिवर्तन तभी अपराध बनता है जब वह कानून में बताए गए गलत तरीकों से कराया गया हो. इनमें बल, जबरदस्ती, धोखाधड़ी, गलत जानकारी, धमकी, अनुचित प्रभाव और लालच जैसे तरीके शामिल हैं. पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक यह कानून शादी या शादी का वादा करके गलत तरीके से कराए गए धर्म परिवर्तन को भी दायरे में लाता है. हालांकि इस कानून में यह नहीं लिखा है कि कोई शख्स अपनी मर्जी से अपना धर्म नहीं बदल सकता.
इस कानून का निशाना स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जबरन या गलत तरीके से कराया जाने वाला धर्म परिवर्तन है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कानून पर बहस के दौरान कहा था कि इसका उद्देश्य स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन या दो अलग-अलग धर्मों या मजहबों को मानने वालों के बीच होने वाले विवाह नहीं हैं.

धर्म परिवर्तन के साथ ही SC, ST कैटेगरी के लाभ स्वतः समाप्त हो जाते हैं
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तो धर्म बदलने वाले व्यक्ति को क्या करना होगा?
नए कानून की सबसे अहम बातों में से एक है पहले से सूचना देने की व्यवस्था.
अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 60 दिन पहले नोटिस देना होगा. धर्म परिवर्तन के बाद भी निर्धारित घोषणा और प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
यही वह हिस्सा है जिसे लेकर सबसे ज्यादा बहस हो रही है.
समर्थकों का कहना है कि इससे प्रशासन को यह जांचने का मौका मिलेगा कि धर्म परिवर्तन अपनी इच्छा से हो रहा है या किसी दबाव, धोखे या लालच के कारण.
वहीं, कानून की आलोचना करने वालों का कहना है कि किसी व्यक्ति के धर्म और आस्था से जुड़े निजी फैसले में इतनी सरकारी प्रक्रिया उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता पर असर डाल सकती है.
कानून में सजा कितनी सख्त है?
नए कानून में सजा भी काफी कड़ी रखी गई है.
सामान्य तौर पर गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के मामले में सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. दोबारा अपराध करने पर सजा 10 साल तक जा सकती है. अगर धर्म परिवर्तन से जुड़ा मामला किसी नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति से जुड़ा है, तो कानून में ज्यादा कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.
एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है कि ऐसे मामलों में अपराध कॉग्निजिबल होंगे यानी ऐसे मामलों में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है. ऐसे मामले गैर जमानती होंगे और मुकदमे की सुनवाई सेशन कोर्ट में होगी. कानून में धर्म परिवर्तन को कराने या उसमें मदद करने वाले व्यक्ति पर यह साबित करने की जिम्मेदारी भी डाली गई है कि धर्म परिवर्तन गैरकानूनी तरीके से नहीं कराया गया था.
यही कारण है कि धार्मिक संस्थाएं कानून लागू होने से पहले ही अपने स्तर पर सावधानी बरत रही हैं.
इस कानून में लालच या प्रलोभन को भी परिभाषित किया गया है. लालच की परिभाषा को केवल पैसे या सामान तक सीमित नहीं रखा गया है.
इसमें गिफ्ट या आर्थिक लाभ के अलावा नौकरी, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवन का वादा, शादी का वादा और चमत्कारी इलाज जैसे दावे भी शामिल किए गए हैं.
आलोचकों की चिंता है कि इन शब्दों की व्याख्या बहुत व्यापक हो सकती है.
मान लें कि कोई धार्मिक संस्था गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देती है या जरूरतमंदों की मदद करती है, ऐसे में कुछ मामलों में इसे धर्म परिवर्तन के लिए लालच माना जा सकता है?
इस तरह के सवालों का स्पष्ट जवाब कानून के वास्तविक इस्तेमाल और आगे आने वाले न्यायिक फैसलों के दौरान अदालतों की व्याख्ता से धीरे-धीरे सामने आएगा.
फिर चर्चों में अभी से इतना डर क्यों?
चर्चों और ईसाई संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ समय में प्रार्थना सभाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और पुलिस शिकायतें बढ़ी हैं. ऐसे में उनका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति खुद लिखकर देता है कि वह अपनी इच्छा से प्रार्थना में आया है, तो भविष्य में उस पर या चर्च पर जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगने की स्थिति में यह एक बचाव का डॉक्युमेंट बन सकता है.
विरार स्थित एक चर्च के पादरी ने बताया कि लगातार हो रहे विरोध और आरोपों को देखते हुए यह कदम सुरक्षा के लिए उठाया गया है. फॉर्म को सुरक्षा इस बात के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है कि लोग अपनी इच्छा से आ रहे हैं.

बजरंग दल
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विरोध करने वाले संगठन क्या कह रहे हैं?
दूसरी तरफ कुछ हिंदू संगठनों का कहना है कि वे धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों पर नजर रख रहे हैं.
बजरंग दल से जुड़े लोगों ने कहा है कि अगर उन्हें किसी प्रार्थना सभा में जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का शक होता है, तो वे पुलिस को सूचना देंगे.
उनका दावा है कि वे कानून के दायरे में रहकर काम कर रहे हैं.
इस पूरे विवाद में पुलिस को दोनों पक्षों की शिकायतें मिली हैं. पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.

प्रतीकात्मक तस्वीर
पुलिस क्या कह रही है?
मुंबई और आसपास के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में ऐसी कुछ शिकायतें जरूर सामने आई हैं, लेकिन अभी इन्हें किसी बड़े संगठित ट्रेंड के रूप में नहीं देखा गया है.
पुलिस का कहना है कि अगर किसी प्रार्थना सभा में कानून का उल्लंघन होता है या किसी पक्ष के साथ हिंसा या जबरदस्ती होती है, तो शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन से जुड़ा यह नया कानून एक तरफ जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन रोकने की कोशिश करता है, तो दूसरी तरफ इसके इस्तेमाल और इसकी व्यापक परिभाषाओं को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.
सबसे अहम फर्क यही है कि किसी व्यक्ति का अपनी इच्छा से धर्म मानना, बदलना या प्रार्थना सभा में जाना अपने आप में गैरकानूनी धर्म परिवर्तन नहीं है.
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