फ्लाईदुबई के एक पायलट को लेकर उठे सुरक्षा विवाद ने अब अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है. इस मामले में पहली बार ओमान सरकार के सीनियर अधिकारी सूत्रों ने NDTV को अहम जानकारी देते हुए दावा किया है कि हमलावर पायलट को सालों पहले ही एविएशन सेक्टर में काम करने पर पाबंदी लगा दी गई थी. अधिकारियों ने दावा किया कि पायलट के खिलाफ उन्हें चरमपंथी वेबसाइटों में रुचि के संकेत मिले थे.
ओमान सरकार के सूत्रों ने NDTV से बातचीत में बताया कि हमलावर पायलट हमाम अल-हमामी ओमान का नागरिक है, लेकिन उसका अधिकांश जीवन संयुक्त अरब अमीरात, सीरिया और अन्य देशों में बीता है. उसकी मां सीरियाई मूल की हैं और परिवार लंबे समय तक ओमान से बाहर रहा है.
वहीं सबसे अहम खुलासा यह है कि उसने एक ओमानी एयरलाइन में सीमित अवधि के लिए ट्रेनी के तौर पर काम किया था. इसी दौरान ओमानी अधिकारियों ने इंटरनेट पर उसकी गतिविधियों की निगरानी में चरमपंथी कंटेट और उग्रवादी वेबसाइटों में उसकी रुचि का पता लगाया. इसके बाद उसे विमानन क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई और जिसके बाद वह ओमान छोड़कर विदेश चला गया.
'हमसे कभी जानकारी नहीं मांगी गई'
ओमानी सूत्रों ने NDTV को बताया कि संबंधित व्यक्ति की बाद की नियुक्तियों से पहले किसी भी देश या संस्था ने ओमान से उसका सुरक्षा सत्यापन (Background Check) नहीं मांगा. सूत्रों के मुताबिक, "यदि ओमान से औपचारिक तौर से जानकारी मांगी जाती, तो हमारे पास उपलब्ध सभी तथ्य संबंधित पक्षों के साथ साझा किए जाते.
यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे यह सवाल उठता है कि आखिर एक ऐसे व्यक्ति की सुरक्षा जांच कैसे हुई, जिसके बारे में पहले से कुछ चिंताएं दर्ज थीं.
इजरायल-UAE एविएशन समझौते पर भी सवाल
ओमान ने एक और अहम बिंदु उठाया है. अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक रूप से ज्ञात नियमों के अनुसार इजरायल और यूएई के बीच विमानन समझौते के तहत उड़ानें केवल यूएई के नागरिक या उन देशों के नागरिक संचालित कर सकते हैं जिन्होंने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए हैं.
ऐसे में ओमान का मानना है कि संबंधित व्यक्ति के पास किसी अन्य देश की नागरिकता भी हो सकती है. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
'कहीं न कहीं हुई बड़ी चूक'
ओमानी अधिकारियों ने पूरे मामले को स्थापित सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रियाओं की विफलता से जोड़ते हुए कहा है कि प्रारंभिक तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है.
सूत्रों के अनुसार, "यह मामला दो देशों के बीच तय प्रक्रियाओं के पालन में कमी की ओर संकेत करता है. इसमें लापरवाही, निगरानी में चूक या कुछ पक्षों द्वारा जानबूझकर अनदेखी जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं"
हालांकि ओमान ने किसी विशेष संस्था, एयरलाइन या देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उसके बयान से यह संकेत मिलता है कि भर्ती और सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस मामले पर
एविएशन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के संबंध में पहले से सुरक्षा संबंधी संकेत उपलब्ध थे और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा नहीं हुए, तो यह वैश्विक विमानन सुरक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है.
अब नजर इस बात पर है कि संबंधित एयरलाइन, नियामक संस्थाएं और संबंधित देशों की एजेंसियां इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देती हैं. वहीं ओमान के ताजा खुलासों के बाद यह विवाद केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है.
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