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This Article is From Sep 10, 2025

अनिल अंबानी की बढ़ती जा रही मुश्किलें, ईडी ने अब मनी लॉन्ड्रिंग का दर्ज किया केस

अगस्त महीने में सीबीआई ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन पर आरोप लगाया था कि, इन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2,929 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है.

अनिल अंबानी की बढ़ती जा रही मुश्किलें, ईडी ने अब मनी लॉन्ड्रिंग का दर्ज किया केस
  • अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन पर एसबीआई को करोड़ों रुपये के फ्रॉड का आरोप लगा है
  • सीबीआई ने अगस्त में अनिल अंबानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनके घर छापेमारी की कार्रवाई की थी
  • बैंक ऑफ इंडिया ने भी आरकॉम और अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित करते हुए फंड डायवर्जन का आरोप लगाया था
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अनिल अंबानी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले सीबीआई ने उनकी यस बैंक मामले को बंद करने की अपील को ठुकरा दिया था और अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी, आरकॉम और अन्य के खिलाफ नया मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया है. मामला एसबीआई को 2,929 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है. इस केस में सीबीआई ने अगस्त महीने एफआईआर दर्ज की थी.

सीबीआई की एफआईआर पर हुई कार्यवाई

दरअसल अगस्त महीने में सीबीआई ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन पर आरोप लगाया था कि, इन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2,929 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है. इसके बाद सीबीआई की टीम ने अनिल अंबानी के घर पर छापे भी मारे थे. ईडी की ये कार्यवाई सीबीआई के इसी केस पर आधारित है.   

अनिल अंबानी ने मामले को बताया पुराना

हालांकि अनिल अंबानी की तरफ से इस मामले को खारिज कर दिया गया था. उनके प्रवक्ता ने बताया कि ये कार्यवाई 10 साल पुराने मामले पर की गई है. 

यह भी पढ़ें- बैंक ऑफ बड़ौदा ने RCom और अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया

बैंक ऑफ इंडिया ने रिलायंस कम्युनिकेशंस पर लिया था एक्शन

इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक के बाद, बैंक ऑफ इंडिया ने भी दिवालिया हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और उसके पूर्व डायरेक्टर अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर दिया था. बैंक ऑफ इंडिया ने आरोप लगाया था कि साल 2016 में फंड डायवर्जन हुआ था.

ईडी पहले भी कर चुकी है पूछताछ

बता दें कि पिछले महीने ईडी ने अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुलाया था. एजेंसी ने 12 से 13 बैंकों से डिटेल मांगी है कि जब रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को लोन दिया गया था तब किस तरह की ड्यू डिलिजेंस यानी जांच की गई थी. 

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