- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र की जड़ें पाताल की गहराइयों तक पहुंचाई हैं.
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की किताब 'द बेंच द बार एंड द बिजारे' और 'द लॉफुल द ऑफुल' का लोकार्पण किया गया.
- देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने ईश्वर से 25वां घंटा भी लिया होगा, तभी इतना उम्दा लिखा है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र की जड़ें पाताल तक पहुंचाई है. शाह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो किताबों 'द बेंच द बार एंड द बिजारे' और 'द लॉफुल द ऑफुल' के लोकार्पण कार्यक्रम में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं यहां तुषार भाई के लिए आया हूं, न्यायपालिका के लिए उचित मंच पर बोलूंगा. कार्यक्रम में देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुषार मेहता की किताबों की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने ईश्वर से 25वां घंटा भी लिया होगा, तभी उन्होंने इतना उम्दा लिखा है.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मेरा यहां आना और बोलना तुषार मेहता के लिए है. मेरे यहां बोलने के दूसरे मायने न निकाले जाएं. मेहता के पास ढेरों शेरो-शायरी और वन लाइनर का खजाना है. साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका के लिए मुझे जो भी कुछ कहना होगा वो उचित फोरम पर कहूंगा.
आम आदमी को अपनी बात सुने जाने का भरोसा: शाह
उन्होंने कहा कि तुषार मेहता भारतीय कोर्ट की बातें भी लिखें तो रोचक होगा. हमारे भारत ने लोकतंत्र की जड़ें पाताल की गहराइयों तक पहुंचाई हैं. आजादी के बाद से सभी लोकतांत्रिक परिवर्तन रक्तहीन और सुनियोजित हुए हैं. आम जनता को न्याय के द्वार खुले होने और अपनी बात सुने जाने का भरोसा है.
उन्होंने कहा कि न्याय आम आदमी की आस, समाज का संतुलन और जनता का विश्वास है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने इस संतुलन को मजबूती से बनाए रखा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका को इसे मजबूती से आगे भी बढ़ाना है. शाह ने कहा कि मुझे पुस्तकें मिली लेकिन बंगाल और अन्य राज्यों के चुनाव के कारण पुस्तकें मैं पढ़ नहीं पाया. मेरी टिप्पणी मेरी टीम का नोट्स है. पुस्तक न्यायिक व्यवस्था की न्यूट्रल मीमांसा है. इसमें कभी कोर्ट में कविता की गूंज सुनाई देती है तो कभी हास्य भी दिखता है.
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उन्होंने ईश्वर से 25वां घंटा भी लिया होगा: जस्टिस सूर्यकांत
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों के लोकार्पण के बाद देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि तुषार भाई की इन दोनों किताबों ने कोर्टरूम ड्रामा बहुत अच्छी तरह विस्तार से लिखा है. उनके लिए दिन अदालतों ने और शाम ब्रीफ पढ़ने में बीतती हैं. ऐसे में उन्होंने ईश्वर से 25वां घंटा भी लिया होगा. तभी उन्होंने इतना उम्दा लिखा है जिसमें कई तरह के भाव वाली कहानियां हैं.
चीफ जस्टिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट और अन्य हाईकोर्ट के कई दिलचस्प किस्से सुनाए. इस दौरान मौजूद लोगों ने चीफ जस्टिस के सुनाए किस्सों पर कहकहे लगाए.
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