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This Article is From Jan 12, 2023

"...इतिहास उनके चश्मे से लिखा गया" : अमित शाह ने कहा-"...लेकिन अब हमें कोई नहीं रोक सकता"

अमित शाह ने कहा, "हर बार हमें बताया गया है कि मुगल पहले साम्राज्य थे, जिन्होंने 200 से अधिक वर्षों तक इस देश पर शासन किया है, लेकिन ऐसा नहीं है! ऐसे अन्य साम्राज्य भी रहे हैं, जिन्होंने 200 से अधिक वर्षों तक भारत पर शासन किया."

"...इतिहास उनके चश्मे से लिखा गया" : अमित शाह ने कहा-"...लेकिन अब हमें कोई नहीं रोक सकता"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया है और भारतीय परिप्रेक्ष्य से इतिहास लिखने का समय आ गया है.
नई दिल्ली:

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया है और भारतीय परिप्रेक्ष्य से इतिहास लिखने का समय आ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औपनिवेशिक अतीत के सभी अवशेषों से छुटकारा पाने के इरादे के अनुरूप, इतिहास को औपनिवेशिक अतीत से मुक्त करना सबसे महत्वपूर्ण है. वीर सावरकर ने पहली बार 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता का पहला युद्ध कहकर इसकी कोशिश की थी.

यह नरेटिव बनाना कि...

एक पुस्तक विमोचन समारोह में अमित शाह ने कहा कि "अहिंसक संघर्ष" का भारत की स्वतंत्रता में बड़ा योगदान था, लेकिन वर्तमान में यह नरेटिव बनाना कि इसमें दूसरों की कोई भूमिका नहीं थी, सही नहीं है. शाह ने कहा, "अगर सशस्त्र क्रांति की समानांतर धारा शुरू नहीं हुई होती तो आजादी पाने में कई और दशक लग जाते. हमें यह समझना होगा कि हमें स्वतंत्रता अनुदान के रूप में नहीं मिली है, यह लाखों लोगों के बलिदान और रक्तपात के बाद मिली है. आज जब मैं कर्तव्यपथ पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा देखता हूं, तो मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है." 

सही ऐतिहासिक तथ्यों को नई पीढ़ी के सामने रखें

अमित शाह की यह टिप्पणी संजीव सान्याल की पुस्तक - "रेवोल्यूशनरीज़, द अदर स्टोरी ऑफ़ हाउ इंडिया ओन इट्स फ़्रीडम" के विमोचन के अवसर पर आई. अमित शाह ने कहा कि "अदर स्टोरी' शब्द इस पुस्तक का सारांश है. आज़ादी की कथा में एक नरेटिव (दृष्टिकोण) को जनता में वर्षों से स्थापित किया गया है. इतिहास लेखन और शिक्षा के माध्यम से जनता पर इस एक दृष्टिकोण को थोपा गया है. मैं यह नहीं कहता कि अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष की कोई भूमिका नहीं है, या यह इतिहास का हिस्सा नहीं है. यह इतिहास का हिस्सा है और इसका बहुत बड़ा योगदान है. लेकिन अहिंसक आंदोलन हो या सशस्त्र क्रांति, दोनों की नींव 1857 की क्रांति में थी और यह सरकार के साथ-साथ इतिहासकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे सही ऐतिहासिक तथ्यों को नई पीढ़ी के सामने रखें.

उग्रवादी बनाम नरमपंथी की...

गृह मंत्री ने कहा, "अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया लेकिन इतिहास उनके चश्मे से लिखा गया. भ्रम अभी भी बना हुआ है." उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं कि इतिहास को आज तक विभिन्न कारणों से तोड़ा-मरोड़ा गया है, लेकिन अब हमें इसे सही तरीके से लिखने से कोई नहीं रोक सकता." उन्होंने कहा कि इतिहास को उग्रवादी बनाम नरमपंथी की धारा से निकालकर यथार्थवादी बनाना होगा. 200 से अधिक वर्षों तक भारत पर शासन करने वाले मुगलों के दावों से इनकार करते हुए, अमित शाह ने कहा, "हर बार हमें बताया गया है कि मुगल पहले साम्राज्य थे, जिन्होंने 200 से अधिक वर्षों तक इस देश पर शासन किया है, लेकिन ऐसा नहीं है! ऐसे अन्य साम्राज्य भी रहे हैं, जिन्होंने 200 से अधिक वर्षों तक भारत पर शासन किया."

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