विज्ञापन
This Article is From Apr 02, 2025

क्या धमकाना चाहते हो भाई... यह संसद का कानून है, सबको स्वीकार करना ही होगा: अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि 1995 तक वक्फ काउंसिल और वक्फ बोर्ड था ही नहीं, बिल को लेकर भ्रम खड़ा किया जा रहा है. वोट बैंक के लिए मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलापों में दखल बताकर उन्हें डराया जा रहा है.

नई दिल्ली:

संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमितश शाह ने एक-एक कर विपक्ष के सभी सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि वक्फ को चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां लोग वक्फ के लिए जमीन दान देते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति का दान नहीं हो सकता है और दान केवल उस जमीन का किया जा सकता है जो व्यक्ति की अपनी हो.

अमित शाह ने कहा कि विपक्षी दल देश तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. वक्फ में गड़बड़ी करने वालों को पकड़ा जाएगा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वक्फ में पैसे की चोरी हो रही है और इसके कई उदाहरण भी हैं. उन्होंने बताया कि 2014 में चुनाव के दौरान रेलवे की भूमि को वक्फ के नाम पर घोषित कर दिया गया था और गांवों पर भी वक्फ ने कब्जा कर लिया था. इसके अलावा, तमिलनाडू में 1500 साल पुराने मंदिर की जमीन पर भी वक्फ ने कब्जा कर लिया था.

कोई भी गैर-मुस्लिम वक्फ में नहीं आएगा - अमित शाह

गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ अधिनियम और बोर्ड 1995 में लागू हुआ. वहीं गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के बारे में उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में गैर-मुस्लिमों की कोई भूमिका नहीं होगी. कोई भी गैर-मुस्लिम वक्फ में नहीं आएगा. धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वालों में किसी भी गैर-मुस्लिम को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है. हम ऐसा नहीं करना चाहते हैं . यह एक बहुत गलत धारणा है कि यह अधिनियम मुसलमानों के धार्मिक आचरण में हस्तक्षेप करेगा और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में हस्तक्षेप करेगा. यह गलत धारणा अल्पसंख्यकों में अपने वोट बैंक के लिए डर पैदा करने के लिए फैलाई जा रही है.

अमित शाह ने कहा कि मैं आज यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि वक्फ, जो हमारे मुस्लिम भाइयों द्वारा धार्मिक गतिविधियों के लिए दान के माध्यम से बनाया गया एक ट्रस्ट है, उसमें सरकार द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. मुतवल्ली उनके समुदाय से होगा, वाकिफ उनका होगा और वक्फ भी उनका होगा.

गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि कलेक्टर को अधिकार क्यों दिया गया है. मुझे बताइए, हमारे देश में जब किसी मंदिर को जमीन अधिग्रहण करने की ज़रूरत होती है, तो ज़मीन का स्वामित्व कौन तय करता है? सभी जानते हैं कि कलेक्टर ही तय करता है. ऐसे मामलों के लिए राजस्व अधिकारी ज़िम्मेदार होता है. इसलिए, अगर सवाल है कि जमीन का कोई टुकड़ा वक्फ का है या नहीं, तो कलेक्टर को इसकी पुष्टि क्यों नहीं करनी चाहिए? इसमें क्या आपत्ति है?

यह संसद का कानून है, सभी को स्वीकार करना होगा: अमित शाह

उन्होंने कहा कि यह संसद का कानून है और सभी को इसे स्वीकार करना होगा. उन्होंने साथ ही कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन में गड़बड़ी हुई. आंकड़े बताते हैं कि 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास 18 लाख एकड़ जमीन थी, जो 2013 से 2025 तक बढ़कर 39 लाख एकड़ हो गई है. यह बढ़ोतरी 2013 के बाद हुई है, लेकिन सवाल यह है कि किसकी इजाजत से यह जमीन बेची गई. अमित शाह ने यह भी बताया कि केरल और देश के चर्चों ने इस बिल का समर्थन किया है.

लेखक के बारे में
img
चंदन वत्स
Chief Sub Editor
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Waqf (Amendment) Bill, Waqf Amendment Bill Hindi News, Waqf Bill In Lok Sabha, Waqf Bill In Parliament, Amit Shah
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com