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Amazon का ऐड बनाने वालों का जीरो पर ज्ञान शून्य, जीरो के कारण ही अमेजिंग है दुनिया

अमेजन के विज्ञापन में शून्य के आविष्कारक भारत में महान गणितज्ञ आयभट्ट और उनकी दुनिया बदलने वाली इस खोज का उपहास उड़ाया गया है. इस विज्ञापन पर हिंदू संगठन ने विरोध जताया है.

Amazon का ऐड बनाने वालों का जीरो पर ज्ञान शून्य, जीरो के कारण ही अमेजिंग है दुनिया
अमेजन के एक विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठन ने नाराजगी जताई है.
नई दिल्ली:

यदि शून्य नहीं होता क्या होता? क्या हमारी दुनिया वैसी ही होती जैसी आज है. जवाब है- बिल्कुल नहीं. जीरो नहीं होता तो मानव सभ्यता आज भी मध्यकाल या उससे भी पीछे जी रही होती. यदि दुनिया से शून्य को हटा दिया जाए, तो गणित और गणनाएं ठप हो जातीं, गिनती रुक जाती, शून्य के बिना हम 9 के आगे नहीं बढ़ पाते. 10, 100, 1000 जैसी संख्याओं को लिखने का कोई आसान तरीका नहीं होता. शून्य के बिना हमें रोमन अंकों (I, V, X, L, C, D, M) जैसी पुरानी प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ता. जिसमें बड़ी संख्याओं का गुणा या भाग करना लगभग असंभव होता है. बिना शून्य के कैलकुलस, बीजगणित (Algebra) और दशमलव प्रणाली का अस्तित्व ही नहीं होता. डिजिटल दुनिया और गैजेट्स गायब हो जाते, कंप्यूटर और इंटरनेट नहीं होते. आज शून्य है तभी हम यहां है. लेकिन ऐसा लगता है कि अमेजन का विज्ञापन बनाने वालों को शून्य के इस महत्व का शायद ज्ञान ही नहीं है. या फिर इस ज्ञान के बाद भी वो क्रिएटिव लिबट्री में भी कुछ भी बना दे रहे हैं. 

अमजेन के एक विज्ञापन से चर्चा में शून्य

शून्य पर आज यह चर्चा अमेजन के एक विवादित विज्ञापन के कारण शुरू हुई है. अमेजन के विज्ञापन में शून्य के आविष्कारक भारत में महान गणितज्ञ आयभट्ट और उनकी दुनिया बदलने वाली इस खोज का उपहास उड़ाया गया है. इस विज्ञापन पर हिंदू संगठन ने विरोध जताया है. हिंदू जनजागृति समिति ने अमेजन को यह विज्ञापन हटाने और बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है. आयभट्ट से जुड़े इस विज्ञापन पर उस पर मचे बवाल पर अमेजन की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. 

शून्य ने कैसे बनाई अमेजिंग बनाई हमारी दुनिया

लेकिन इस बहस के बीच यह जानना मौजूं है कि जीरो ने कैसे हमारी दुनिया को अमेजिंग बनाई. यदि आयभट्ट ने जीरो का आविष्कार नहीं किया होता तो कंप्यूटर, मोबाइल की यह दुनिया नहीं बनती. क्योंकि कंप्यूटर की पूरी भाषा (बाइनरी कोड) केवल '0' और '1' पर चलती है. यदि शून्य नहीं होता, तो कोई कोडिंग नहीं होती, कोई सॉफ्टवेयर नहीं होता और न ही आज स्मार्टफोन, लैपटॉप या इंटरनेट होता. डिजिटल स्क्रीन काली हो जातीं आपके टीवी, बैंक एटीएम और डिजिटल घड़ियों का अस्तित्व ही खत्म हो जाता.

  • विज्ञान और इंजीनियरिंग का विकास रुक जाता, अंतरिक्ष विज्ञान शून्य हो जाता. नासा या इसरो जैसी संस्थाएं चांद या मंगल पर रॉकेट नहीं भेज पातीं. अंतरिक्ष यात्रा के लिए सटीक गणनाओं (शून्य और अनंत के सिद्धांतों) की आवश्यकता होती है. 
  • इमारतों और पुलों का निर्माण असंभव होता: आधुनिक वास्तुकला (Architecture) और सिविल इंजीनियरिंग पूरी तरह से उन्नत गणित पर टिकी हैं। शून्य के बिना गगनचुंबी इमारतें या बड़े पुल बनाना मुमकिन नहीं होता.
  • अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था ध्वस्त हो जाती, पैसों का हिसाब खत्म हो जाता. बैंक अकाउंट नंबर, ब्याज दरें, शेयर बाजार और देश की जीडीपी (GDP) का हिसाब लगाना नामुमकिन हो जाता. 
  • करेंसी नोट बेकार हो जाते: बिना शून्य के 10, 50, 100, और 500 रुपये के नोटों का कोई वजूद नहीं होता
  • दैनिक जीवन की माप अधूरी रहती. तापमान और समय को नहीं माप पाते. समय के सटीक माप और टाइम ज़ोन (जैसे 00:00 घंटे) का निर्धारण बेहद कठिन हो जाता.

शून्य मानव इतिहास की सबसे क्रांतिकारी खोजों में से एक

दरअसल शून्य (0) का आविष्कार मानव इतिहास की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खोजों में से एक है. इसके बिना आधुनिक विज्ञान, गणित और तकनीक की कल्पना भी नहीं की जा सकती. शून्य के आने से पहले बड़ी संख्याओं को लिखना और गिनना बेहद जटिल था. इसके आने से 'स्थान-मान प्रणाली' (Place-value system) का जन्म हुआ. शून्य की खोज के बाद ही जोड़, घटाना, गुणा और भाग जैसी बुनियादी गणनाएं आसान और सटीक बन पाईं.

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