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अभेद्य सुरक्षा घेरे के बीच होगी अमरनाथ यात्रा, परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर

अमरनाथ यात्रा को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक चौबंद की गई है. पहली बार, निजी वाहनों से आने वाले यात्रियों को भी जम्मू से तय सुरक्षा काफिले में शामिल होना होगा. पहलगाम या बालटाल के लिए अकेले निकलने पर रोक है.

अभेद्य सुरक्षा घेरे के बीच होगी अमरनाथ यात्रा, परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर
अमरनाथ यात्रा को लेकर इस और पुख्ता हैं इंतजाम
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अमरनाथ यात्रा को लेकर इस बार जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर किए गए इंतजाम पहले से कहीं ज्यादा हैं. सुरक्षा में सेना से लेकर स्थानीय पुलिस की भी तैनाती है. चप्पे पर नजर है. किसी घटना से निपटने के लिए फोर्स पूरी तरह से तैयार है. अमरनाथ यात्रियों को हर पड़ाव पर विशेष सुरक्षा दिए जाने की तैयारी है. ऑपरेशन सिंदूर की यादें अब भी ताज़ा हैं और ताज़ा घुसपैठ के इनपुट रडार पर हैं. ऐसे में जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने यात्रा का पूरा नक्शा ही बदल दिया है. जम्मू पुलिस के IGP भीम सेन तूती ने कहा कि सुबह 6 से 8 बजे तक लखनपुर पहुंचने वाले यात्रियों को ही सुरक्षा घेरे में जम्मू तक ले जाया जाएगा. 8 बजे के बाद आने वालों को लखनपुर में ही रुकना होगा.लखनपुर से जम्मू तक NH-44 अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ ही किलोमीटर दूर है. इसलिए एजेंसियां कोई चांस नहीं लेना चाहतीं. अतीत में आतंकी IB पार कर कठुआ-जम्मू मार्ग पर सुरक्षा कैंपों और आम लोगों को निशाना बना चुके हैं. इस बार कोई जोखिम नहीं. लखनपुर से भगवती नगर बेस कैंप तक हर अमरनाथ यात्री सिर्फ सुरक्षा कवच में चलेगा. आस्था अब फोर्स के साए में सफर करेगी — सबसे कड़ी सुरक्षा के साथ यात्रा का आगाज़. 

एक द्वार, एक रास्ता

इस बार नियम साफ है. लखनपुर ,J&K का प्रवेश द्वार पार करते ही अमरनाथ यात्रियों के लिए सिर्फ नेशनल हाईवे खुला है. उधमपुर-धार रोड और मुगल रोड पूरी तरह बंद हैं. तूती ने कहा कि यह यात्रा की सुरक्षा को पहले से भी ज्यादा मजबूत करने के लिए है. उधमपुर से बनिहाल के बीच मिनी-काफिले तय समय पर चलेंगे, ताकि भीड़ को बांटा जा सके.यह यात्रा ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद हो रही है, जब 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय की हत्या के बाद भारतीय बलों ने LoC पार आतंकी कैंपों पर हमला किया था.

कठुआ के ऊपरी इलाकों में आतंकियों की हलचल के इनपुट हैं. सूत्रों के मुताबिक इस साल भी घुसपैठ की कोशिशें हुई हैं. पिछले साल कठुआ में मुठभेड़ भी हुई थी. लखनपुर से जम्मू तक NH-44 सीमा के बेहद करीब से गुजरता है. जवाब में, सीमा को हाईवे से जोड़ने वाली हर लिंक रोड पर अतिरिक्त बल तैनात हैं. जगह-जगह नाके लग गए हैं. रात का सफर बंद है. हर काफिले के लिए कश्मीर के बेस या ट्रांजिट कैंप तक पहुंचने की डेडलाइन तय है.

निजी गाड़ी नहीं, सिर्फ काफिला 

पहली बार, निजी वाहनों से आने वाले यात्रियों को भी जम्मू से तय सुरक्षा काफिले में शामिल होना होगा. पहलगाम या बालटाल के लिए अकेले निकलने पर रोक है. नया नियम साफ है काफिले में चलो, वरना रुको. इस बार नियंत्रित आवाजाही को संभालने के लिए प्रशासन ने लखनपुर से बनिहाल के बीच 55,000 यात्रियों के लिए सुरक्षित ठहराव बनाए हैं. डिविजनल कमिश्नर जम्मू रमेश कुमार ने कहा कि रहने, खाने, साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम हैं ताकि किसी यात्री को परेशानी न हो. सरकारी लॉज, अस्थायी शेल्टर, सिविल सोसाइटी के डोरमेट्री और लंगर चालू कर दिए गए हैं. स्वास्थ्य, सफाई और परिवहन व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

उपराज्यपाल ने दिखाई हरी झंडी

आज उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भगवती नगर से पहले दो जत्थों को हरी झंडी दिखाई. ये जत्थे शाम तक पहलगाम और बालटाल पहुंच जाएंगे. 3,880 मीटर ऊंचे अमरनाथ गुफा मंदिर की 57 दिन की यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है. दो रास्ते हैं: अनंतनाग का 48 किमी लंबा पारंपरिक पहलगाम मार्ग और गांदरबल का 14 किमी का सीधा बालटाल मार्ग. इस साल बाबा बर्फानी तक का रास्ता सुरक्षा घेरे से होकर जाता है. 

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