- सपा की आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने की योजना है
- सपा 2027 चुनाव में एससी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाकर दलित राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है
- अखिलेश यादव नीले रंग को दलितों का प्रतीक मानते हुए खुद को दलित नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं
यूपी चुनाव की रणभेरी तो नहीं बजी है पर रणनीति जरूर बनने लगी है. पासे फेके जाने लगे हैं और मुद्दों को गरमाया जाने लगा है. बीजेपी की तरफ से सीएम योगी आदित्यनाथ फिलहाल बैटिंग में लगे हुए हैं तो विपक्ष की तरफ से अखिलेश यादव अपनी फिल्डिंग कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव की तर्ज पर पीडीए को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं. मगर उसमें भी उनका खास ध्यान अपने 'अयोध्या मॉडल' पर है.
सपा का विधानसभा प्लान
2027 के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश के अहम दलित वोट बैंक पर नजर रखते हुए, सपा एक खास योजना पर काम कर रही है. इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) जाति के लोगों को 14 सामान्य सीटों पर टिकट दिए जाएंगे. इससे आरक्षित उम्मीदवारों की कुल संख्या कम से कम 100 हो जाएगी. फिलहाल एससी आरक्षित 85 सीटें हैं और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित दो सीटें हैं. सपा ने ये योजना पार्टी के PDA — पिछड़ा (OBC), दलित, अल्पसंख्यक (Minorities) एजेंडे को और मजबूत करने के लिए बनाई गई है.

कांशीराम को श्रद्धासुमन अर्पित करते अखिलेश यादव.
सपा का क्या है मकसद
सपा के सूत्रों ने बताया कि सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों को उतारने का मकसद मैसेज देना है. मैसेज कि सपा दलितों को आगे बढ़ा रही है. मायावती के ज्यादा सक्रिय नहीं रहने की वजह से ये वर्ग बीजेपी के पाले में चला गया. ऐसे में अखिलेश यादव विधानसभा चुनावों में 100 दलित उम्मीदवारों को उतारकर दलित राजनीति का चैंपियन बनना चाहते हैं. उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस एक कदम से दलितों का वोट काफी संख्या में सपा को मिलेगा और इसी के जरिए यूपी के सीएम ऑफिस का दरवाजा एक बार फिर उनके लिए खुल जाएगा.
मगर इसमें एक पेंच भी
हालांकि, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि सपा को ऐसे दलित उम्मीदवारों मिल पाते हैं या नहीं कि वे सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ सकें. सपा ने उन सीटों की भी पहचान कर ली है, जहां से इन दलित उम्मीदवारों को लड़ाया जाएगा. हालांकि, इसमें एक और पेंच है. पेंच ये है कि सपा ऐसी सीटों पर इन उम्मीदवारों को टिकट देगी, जिनपर सपा खुद मजबूत स्थिति में नहीं है. सपा को उम्मीद है कि जो करिश्मा 2024 लोकसभा चुनाव में अवधेश प्रसाद ने किया था, वही करिश्मा इस बार ये दलित उम्मीदवार करेंगे. सपा ने 2024 में दो दलितों को सामान्य सीट पर उतारा था. एक फैजाबाद, जिसमें अयोध्या आती है, और दूसरी मेरठ. फैजाबाद सीट पर अवधेश प्रसाद बीजेपी के गढ़ में जीत गए. हालांकि, मेरठ में सुनीता वर्मा बीजेपी के अरुण गोविल से हार गईं.

नीला रंग होगा और गाढ़ा
इसके बाद से अखिलेश यादव को नीला रंग पसंद आने लगा. वो कई बार नीले रंग के गमछे के साथ नजर आने लगे और खुद को दलितों के नेता के रूप में दिखाने लगे. यहां तक की बाबा आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती भी सपा कार्यकर्ता मनाने लगे. ये सब कुछ 2024 लोकसभा चुनाव के बाद से शुरू हुआ और अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आते जाएंगे नीला रंग सपा के लाल रंग पर हावी होता जाएगा. सपा का मानना है कि यादव, मुस्लिम वोटबैंक में अगर दलित भी जुड़ जाता है तो वो उसकी नैय्या पार हो जाएगी.
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