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आकाश के करियर पर फिर छाए बादल, देखिए भारत की राजनीति में भतीजों का रिपोर्ट कार्ड

भारतीय राजनीति में अपको बेटों के अलावा भतीजों का भी खूब जिक्र मिलेगा जो किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहते हैं. अभी सबसे अधिक चर्चा में हैं आकाश आनंद

आकाश के करियर पर फिर छाए बादल, देखिए भारत की राजनीति में भतीजों का रिपोर्ट कार्ड
भारतीय राजनीति के भतीजे
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भारतीय राजनीति में वंशवाद को लेकर काफी चर्चा होती रहती है मगर अपने यहां कई तरह का वंशवाद है जैसे पिता या माता से बेटा या बेटी को सत्ता मिलती है या उन्हें राजनीति में फायदा पहुंचता है. लेकिन भारतीय राजनीति में अपको बेटों के अलावा भतीजों का भी खूब जिक्र मिलेगा जो किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहते हैं. अभी सबसे अधिक चर्चा में हैं आकाश आनंद, जी हां ये मायावती के भतीजे हैं और बार बार कहा जाता है कि आकाश आनंद ही मायावती के असली उत्तराधिकारी हैं. मगर मायावती ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बुलाई बैठक के बाद यह एलान कर दिया कि आकाश अभी अपरिपक्व हैं और इस चुनाव में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी.

आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं और उन्होंने लंदन से एमबीए किया है. राजनीति में उनका आगमन वैसे तो 2017 विधानसभा चुनाव के वक्त ही हो गया था और उन्हें बीएसपी का नेशनल कोर्डिनेटर बनाया गया था, तभी से यह कहा जाने लगा कि आकाश ही बीएसपी के भविष्य हैं, मगर बार बार मायावती आकाश को जमीन पर पटक देती हैं, शायद मायावती को आकाश आनंद की आक्रामक राजनीति पसंद नहीं है. हाल में ही आकाश ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कुछ तीखे सवाल पूछे थे, यही नहीं आरक्षण के मुद्दे पर वो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साध चुके हैं .

यही नहीं लखनऊ में एक कैब ड्राइवर के मामले में भी आकाश आनंद ने रैपिडो के खिलाफ काफी तीखा ट्वीट किया था जिसमें आरएसएस प्रमुख का भी जिक्र था. जानकार आकाश आनंद से मायावती की गुस्से की वजह इन्हीं कारणों को मानती है. अब इंतजार करना होगा कि कब मायावती आकाश आनंद पर दुबारा से मेहरबान होती हैं और पार्टी में उन्हें कोई पद देती हैं.

आकाश आनंद के बाद एक और भतीजा है जो आजकल राजनीति की सुर्खियां बटोर रहा है, वह है ममता बनर्जी का भतीजा अभिषेक बनर्जी. अभिषेक ममता बनर्जी के भाई के बेटे हैं इन्होंने एमबीए किया हुआ है और राजनीति में इनका आगमन 2011 में हुआ जब ममता बनर्जी पहली बार पश्चिम बंगाल की कुर्सी पर बैठी. अभिषेक तीन बार के सांसद हैं, 2014 में जब वे पहली बार लोकसभा चुनाव में जीते तब वे संसद में सबसे कम उम्र के सांसद थे और 2024 लोकसभा चुनाव में अभिषेक बनर्जी के जीत का अंतर 7 लाख से अधिक वोटों का था. एक तरफ मायावती जहां अपने भतीजे आकाश आनंद को कभी राष्ट्रीय संयोजक बनाती हैं फिर हटाती हैं, वहीं ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को हमेशा आगे बढ़ाने का प्रयास करती रहीं.

अभिषेक बनर्जी तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तक पहुंचे. हां ये बात भी है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद जब तृणमूल कांग्रेस में विद्रोह हुआ और पार्टी टूटी उसकी वजह भी अभिषेक बनर्जी ही बताए गए और बाद में ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया मगर इसके बाद भी अभिषेक बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में हैसियत बनी हुई है.

आकाश आनंद और अभिषेक बनर्जी के अलावा जब भी भारतीय राजनीति में भतीजे के बारे में लिखा जाएगा स्वर्गीय अजीत पवार का जिक्र जरूर किया जाएगा क्योंकि शरद पवार के भतीजे होने के बावजूद महाराष्ट्र की राजनीति में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई.पहले वो शरद पवार के साथ रहे मगर जब उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई तब भी महाराष्ट्र की राजनीति में उनका रूतबा कम नहीं हुआ वो फिर से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने,विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के साथ रहते हुए भी कई मुद्दों पर अपनी अलग राय रखते हुए सफलता भी पाई.दोनों एनसीपी में विलय भी होना तय हो गया था मगर विमान दुर्घटना में उनके असामयिक निधन के बाद ये मामला लटक गया.अभी अजीत पवार की एनसीपी केन्द्र में एनडीए का हिस्सा है और उनकी पत्नी महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री हैं.

राजनीति में भतीजे की इस सूची में दुष्यंत चौटाला का भी नाम आता है. दुष्यंत चौटाला हरियाणा के देवीलाल परिवार से आते हैं और ओम प्रकाश चौटाला के पोते हैं.2014 में वो इनलो से सांसद भी रहे मगर अपने चाचा अभय चौटाला से मतभेद के बाद जननायक जनता पार्टी नाम से अलग दल बनाया और विधानसभा चुनाव में जीत के बाद 2019 से 2024 तक हरियाणा के उपमुख्यमंत्री रहे.

मनप्रीत बादल पंजाब की राजनीति में एक ऐसा नाम है जिन्होंने 9 बार पंजाब का बजट पेश किया और जो प्रकाश सिंह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों की सरकार में वित्त मंत्री रहे. मनप्रीत बादल प्रकाश सिंह बादल के भतीजे हैं जिनकी शिक्षा दून स्कूल,स्टीफेन्स कॉलेज और लंदन यूनिवर्सिटी में हुई. वो प्रकाश सिंह बादल की सरकार में 2007-2010 तक वित्त मंत्री रहे. मगर प्रकाश सिंह बादल से मतभेद के बाद उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया और पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब के नाम से अपनी पार्टी बनाई जो ज्यादा सफल नहीं रही. फिर मनप्रीत बादल ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया. मनप्रीत सिंह 2017 से 2022 तक कांग्रेस सरकार में भी वित्त मंत्री रहे, फिर उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी और आजकल बीजेपी में हैं.

राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं और सबसे बड़ी बात है कि वो बाला साहब ठाकरे के भतीजे हैं. राज ठाकरे ने बाला साहब ठाकरे के साथ उनकी सप्ताहिक पत्रिका मार्मिक में बतौर कार्टूनिस्ट भी काम किया.1990 के दशक में राज ठाकरे ने भारतीय विद्यार्थी सेना का गठन किया तब लोग उन्हें बाला साहब ठाकरे का उत्तराधिकारी समझने लगे थे.मगर शिवसेना में उद्धव ठाकरे को आगे किया जाने लगा और 2006 में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया.राजनीतिक रूप से उन्हें बहुत सफलता नहीं मिली मगर कई कॉरपोरेशन में वो अपनी उपस्थिति जताने में सफल रहे.उत्तर भारतीयों के खिलाफ उनके मुहिम की महाराष्ट्र के बाहर आलोचना भी हुई.मगर अब उद्धव और राज ठाकरे मिलकर काम कर रहे हैं.

इसी तरह उत्तरप्रदेश में भी अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव भी राजनीति में हैं. अखिलेश और रामगोपाल यादव सांसद हैं तो शिवपाल यादव उत्तरप्रदेश की विधानसभा में हैं.

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