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PM मोदी का यूं ही नहीं डोभाल पर भरोसा, जानें क्यों भारत के 'जेम्स बॉन्ड' से घबराते हैं पाक-चीन

अजीत डोभाल 1968 में केरल कैडर से आईपीएस में चुने गए थे. वह सक्रिय रूप से मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में आंतकवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं. डोभाल का जन्म 1945 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (अब उत्तराखंड में) के पौड़ी गढ़वाल के घिरी बनेलस्यूं गांव में हुआ था.

PM मोदी का यूं ही नहीं डोभाल पर भरोसा, जानें क्यों भारत के 'जेम्स बॉन्ड' से घबराते हैं पाक-चीन
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने अजीत डोभाल (NSA Ajit Doval) को फिर से भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया है. कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने पीके मिश्रा (PM Mishra) को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के प्रधान सचिव के रूप में फिर से नियुक्त किया है. डोभाल अपने कार्यों से चर्चा में रहते हैं और भारत के 'जेम्स बॉन्ड' के नाम से दुनिया में मशहूर हैं. 

केरल कैडर से IPS
अजीत डोभाल 1968 में केरल कैडर से IPS में चुने गए थे. वह सक्रिय रूप से मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में आंतकवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं. डोभाल का जन्म 1945 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (अब उत्तराखंड में) के पौड़ी गढ़वाल के घिरी बनेलस्यूं गांव में हुआ था. डोभाल के पिता मेजर जीएन डोभाल भारतीय सेना में अधिकारी थे. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के अजमेर स्थित अजमेर मिलिट्री स्कूल में की. 1967 में आगरा यूनिवर्सिटी से उन्होंने अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन की डिग्री ली.

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अजीत डोभाल का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. उन्होंने बतौर पुलिस अधिकारी काफी ऑपरेशन किए. उन्होंने कांग्रेस के साथ भी उतना ही काम किया है, जितना बीजेपी की सरकारों के साथ किया.उन्होंने ज्यादा से ज्यादा डिटेल के साथ ऑपरेशनों का ऑपरेशन किया. सबसे पहले मिजो एकॉर्ड का नाम सामने आता है, उसमें उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.

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जब डोभाल को कार्ति चक्र से नवाजा गया
जब सिक्किम को राज्य का दर्जा दिया गया था, तब भी अजीत डोभाल ने अहम रोल निभाया था. जब 1984 के दंगे हुए थे तब वे पाकिस्तान में थे. वे वहां जासूस के रूप में काम कर रहे थे. जब 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर हुआ था, तब भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. बताया जाता है कि तीन महीने तक वे बतौर पाकिस्तानी एजेंट आतंकवादियों के साथ स्वर्ण मंदिर में छुपे रहे थे. उन्हीं के नेतृत्व में NSG का ऑपरेशन कामयाब हुआ था. इसी के चलते उन्हें कार्ति चक्र से नवाजा गया था.

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कांधार गए थे डोभाल
1995 में जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब डोभाल ने अहम भूमिका निभाई थी. कश्मीर में 1990 के दशक में आतंकवाद का दौर शुरू हो गया था. उसके बाद पहले चुनाव 1995 में हुए थे. सन 1999 में कांधार में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जब आईसी 814 हाईजैक हुआ था. हाईजैकर्स ने कांधार जाकर प्लेन पार्क कर दिया था. आतंकवादियों से डील करने के लिए डोभाल वहां गए थे. वे विमान के अंदर भी गए थे. उनके प्रयासों से सारे यात्रियों को छोड़ दिया गया था.

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इंडिपेंडेंट फॉरेन पॉलिसी में डोभाल का अहम रोल 
2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार सरकार बनाई तब डोभाल दुबारा लाइम लाइट में आए और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में उनसे जुड़े. वे इसलिए चुने गए क्योंकि वे राष्ट्रवादी विचारधारा पर विश्वास करते हैं. वे हमेशा कहते हैं कि हमेशा नेशन फर्स्ट होना चाहिए. भारत के हित को वे हमेशा ऊपर रखते हैं, जिसके चलते उन्हें यह अहम भूमिका दी गई थी. उन्होंने 2014 से 2019 तक कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन किए. उनका सबसे पहला अहम ऑपरेशन वह था जिसमें इराक में फंसीं नर्सों को वापस लाया गया था. उन्होंने इंडिपेंडेंट फॉरेन पॉलिसी को लेकर भारत सरकार को एक रास्ता दिखाया. भारत की एक देश के रूप में मजबूत छवि बनाने में उन्होंने काफी मदद की थी. अमेरिका और रूस के साथ संतुलन बनाकर चलने की पॉलिसी में भी दिशा-निर्देश अजीत डोभाल ने ही दिए थे.

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सर्जिकल स्ट्राइक में अजीत डोभाल की अहम भुमिका
प्रधानमंत्री मोदी की जो विश्व नेता के रूप में छवि बनी उसमें भी अजीत डोभाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि उन्होंने अपने सारे काम स्टेज के पीछे रहकर किए. उरी की सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा हमले के बाद बालाकोट और साइबर टेरर जैसे मामलों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.

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खास मिशन पर पाकिस्तान गए थे डोभाल
अजीत डोभाल पाकिस्तान में रह कर भारत के लिए जासूसी की थी. ऐसा कहा जाता है कि उन्हें एक खास मिशन पर पाकिस्तान भेजा गया था. पाकिस्तान में उन्होंने कई तरह के काम किए. वहां उन्होंने रिक्शा चलाई. डोभाल दाऊद इब्राहिम के आतंकी और खुफिया गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गए पाकिस्तान गए थे.

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डोभाल ने बताया था पाकिस्तान एक किस्सा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एकबार  इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान की एक कहानी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि जब वे पाकिस्तान में थे तो एक दिन मस्जिद की सीढ़ियां उतरते हुए उन्हें एक आदमी ने पकड़ लिया था. उस आदमी ने डोभाल से पूछा तुम हिंदू हो? डोभाल ने जवाब दिया नहीं. वो आदमी नहीं माना और डोभाल को एक कमरे में ले गया और दरवाजा बंद कर दिया. पाकिस्तान से उस आदमी से डोभाल से पूछा तुम्हारे कानों में छेद है और ये  हिुंदू लोग अपने बच्चे के कानों को छेद करवाते हैं. तुम इसे बंद करवा लो नहीं तो फंस जाओगे. बाद में डोभाल ने अपने कान की प्लास्टिक सर्जरी कराई.

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