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जन्म से श्मशान तक सिर्फ टैक्स... लोकसभा में अभिषेक बनर्जी ने सरकार को घेरा

टीएमसी नेता ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर भी चिंता जताई और कहा कि भारी सब्सिडी वाले विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है. उन्होंने केंद्र से घोषणाओं से आगे बढ़कर किसानों की आय सुरक्षा और संस्थागत समर्थन सुनिश्चित करने की अपील की.

जन्म से श्मशान तक सिर्फ टैक्स... लोकसभा में अभिषेक बनर्जी ने सरकार को घेरा
  • अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार की टैक्स नीतियों को टैक्स आतंक बताया और आम नागरिकों पर करों का बोझ बताया.
  • उन्होंने कहा कि जन्म से मृत्यु तक हर व्यक्ति पर शिशु उत्पादों से लेकर अंतिम संस्कार तक टैक्स लगता है.
  • बनर्जी ने बताया कि आम नागरिक तीन तरह के टैक्स आयकर, जीएसटी और महंगाई के रूप में प्रभावी रूप से देता है.
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नई दिल्ली:

लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान एआईटीसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार की टैक्स नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे 'टैक्स आतंक' करार दिया. उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था में एक आम नागरिक जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक करों के जाल में फंसा हुआ है. बनर्जी ने सदन में उदाहरण देते हुए कहा कि एक बच्चा जब पैदा होता है, तो उसके शिशु उत्पादों और स्कूली स्टेशनरी पर जीएसटी वसूला जाता है, और यह सिलसिला व्यक्ति के अंतिम सफर तक जारी रहता है, जहां अंतिम संस्कार से जुड़ी सामग्रियों पर भी टैक्स का बोझ डाल दिया गया है.

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि एक आम नागरिक प्रभावी रूप से 'ट्रिपल टैक्स' देता है. स्रोत पर कटने वाला आयकर, उपभोग पर जीएसटी और महंगाई, जिसे उन्होंने 'मोस्ट साइलेंट टैक्स' बताया. उन्होंने कहा, “मैं ऐसे भारत से आता हूं जो खुद को विश्व गुरु कहता है. लेकिन मैं ऐसे भारत से भी आता हूं जो एक ही नागरिक से तीन-तीन टैक्स वसूलना जानता है.”

'क्या बंगाली बोलना आपको बांग्लादेशी बना देता है?'

अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में बंगाली पहचान के कथित कलंकित किए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मैं ऐसे भारत से आता हूं जहां बंगाली बोलना आपको बांग्लादेशी बना देता है, और मछली खाना आपको मुगल बना देता है. उन्होंने कहा कि “जय बांग्ला” या “आमार सोनार बांग्ला” जैसे नारे, जो बंगाल के इतिहास और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े हैं, कुछ हलकों में संदेह की नजर से देखे जा रहे हैं.

'सड़क पर चलाने के लिए चार टैक्स': ईंधन, रोड और टोल का बोझ'

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आम नागरिक को सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए कई तरह के टैक्स चुकाने पड़ते हैं. लोकसभा में उन्होंने कहा कि एक वेतनभोगी व्यक्ति पहले आयकर देता है, फिर वाहन खरीदते समय रोड टैक्स, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में शामिल ईंधन कर, और अंत में राजमार्गों पर टोल टैक्स. यह गतिशीलता से जुड़े “चार टैक्स” हैं—आयकर, रोड टैक्स, ईंधन कर और टोल शुल्क.

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'हर दिन लगभग 30 किसान आत्महत्या करते हैं...'

अभिषेक बनर्जी ने कृषि संकट पर भी जोर देते हुए कहा कि बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी पर चुप्पी है और उर्वरकों पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई. संसद में आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हर दिन लगभग 30 किसान आत्महत्या करते हैं, जो निरंतर नीति विफलता को दर्शाता है.

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