पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच रिपोर्ट पर पायलट संगठन ने आपत्ति जताई है. संगठन ने जांच को लेकर सवाल उठाते हुए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को पत्र लिखकर AI171 विमान हादसे की दोबारा जांच कराने की मांग की है. इसके अलावा फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पत्र में सिम्युलेटर टेस्ट की भी मांग की है. संगठन का कहना है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दिए गए कुछ तकनीकी निष्कर्षों और हाल में किए गए सिम्युलेटर परीक्षणों के परिणामों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.
सिम्युलेटर टेस्ट पर आपत्ति!
FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने हादसे की दोबारा जांच और सिम्युलेटर टेस्ट की मांग को लेकर AAIB को पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया कि उन्हें अमेरिका की कानूनी फर्म Beasley Allen के वकील डी. माइकल एंड्रयूज का पत्र मिला है. दावा किया गया कि बोइंग 787 विमान पर किए गए सिम्युलेटर परीक्षण AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताई गई समय-सीमा का समर्थन नहीं करते. जानकारी के मुताबिक, विवाद का मुख्य मुद्दा विमान के RAT सिस्टम से जुड़ा है.
FIP का कहना है कि यदि सिम्युलेटर परीक्षण सही हैं और वास्तविक परिस्थितियों का सही प्रतिनिधित्व करते हैं, तो इससे यह संभावना बनती है कि RAT ईंधन आपूर्ति बाधित होने से पहले ही सक्रिय हो चुका था. ऐसा होने पर यह संकेत मिल सकता है कि विमान में पहले से कोई विद्युत या तकनीकी खराबी मौजूद थी.
FIP की तरफ से लिखे गए पत्र के मुताबिक, दुर्घटना से पहले विमान से कई ACARS मेंटेनेंस संदेश भेजे गए थे. कुछ यात्रियों और जीवित बचे व्यक्ति ने तेज धमाके जैसी आवाज और केबिन की रोशनी कम होने जैसी घटनाओं का जिक्र किया है. इन सभी तथ्यों को एक साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी विद्युत प्रणाली की खराबी ने दुर्घटना में भूमिका तो नहीं निभाई.
AAIB से फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स की मांग
- बोइंग 787 के व्यापक सिम्युलेटर परीक्षण कराए जाएं
- इन परीक्षणों में FIP के एक पर्यवेक्षक को शामिल किया जाए
- RAT की तैनाती, हाइड्रोलिक पावर उपलब्ध होने और फ्यूल कंट्रोल स्विच की गतिविधि के बीच संबंध की स्वतंत्र जांच की जाए
- अहमदाबाद एयरपोर्ट के सुरक्षा कैमरों की वीडियो फुटेज स्वतंत्र विश्लेषण के लिए उपलब्ध कराई जाए
- एयर इंडिया और बोइंग से दुर्घटना से पहले भेजे गए तकनीकी संदेशों का विस्तृत विश्लेषण कराया जाए
FIP ने अपने पत्र में कहा है कि यदि तकनीकी विसंगतियां मौजूद थीं तो यह जांचना जरूरी है कि उन्हें समय रहते क्यों नहीं उठाया गया. संगठन का कहना है कि बिना पूरी जांच के "पायलट सुसाइड" जैसी अटकलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बढ़ावा मिलने से पायलट समुदाय की छवि प्रभावित हुई है. इसलिए अंतिम रिपोर्ट में सभी तकनीकी तथ्यों और सिम्युलेटर परीक्षणों को शामिल किया जाना चाहिए . FIP ने पत्र की कॉपी पीएमओ, डीजी DGCA, नागरिक विमान्न मंत्री और नागरिक विमान्न सचिव को भी भेजा है.
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