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फ्रॉड के मामलों से कैसे निपटते हैं? यूजरनेम फीचर पर वॉट्सऐप के बाद टेलीग्राम को भी सरकार का नोटिस

केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले वॉट्सएप को नोटिस भेजा था. पिछले महीने धोखाधड़ी, इम्पर्सोनेशन और संवेधनशील कंटेंट के प्रसार से जुड़ी चिंताओं के कारण टेलीग्राम भी जांच के दायरे में गया था.

फ्रॉड के मामलों से कैसे निपटते हैं? यूजरनेम फीचर पर वॉट्सऐप के बाद टेलीग्राम को भी सरकार का नोटिस
नई दिल्ली:

व्हॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर रोक लगाने के बाद भारत सरकार ने अब टेलीग्राम और सिग्नल ऐप को नोटिस भेजा है.आईटी मिनिस्ट्री ने टेलीग्राम और सिग्नल ऐप से मौजूदा यूजरनेम फीचर को लेकर सवाल पूछा है. मंत्रालय ने कहा कि यदि आपके प्लेटफॉर्म पर किसी यूजरनेम द्वारा फ्रॉड किया जाता है तो आप उससे कैसे निपटते हैं? इसके अलावा नोटिस में मंत्रालय ने दोनों ऐप्स से पूछा है कि आखिर आपके यूजरनेम वाले फीचर को क्यों जारी रखने दिया जाए. इससे पहले बुधवार को केंद्र सरकार ने मेटा को यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था. सरकार का कहना है कि इससे ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसे मामले बढ़ जाएंगे.

डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम लगातार बढ़े

बुधवार को केंद्र सरकार ने WhatsApp के 'यूज़रनेम' फ़ीचर को लेकर Meta को एक नोटिस भेजा है. सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम और किसी और का रूप धरकर (इम्पर्सोनेशन) किए जाने वाले हमलों में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार ने WhatsApp को यह भी निर्देश दिया था कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फ़ीचर को रोक दिया जाए. सूत्रों के अनुसार, सरकार ने अब दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की भी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है.

व्हॉट्सएप से पूछा गया कार्रवाई क्यों ना की जाए

PTI के सूत्रों अनुसार IT मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी पत्र लिखा है (जिनमें पहले से ही यूज़रनेम फ़ीचर मौजूद है) और पूछा है कि वे धोखाधड़ी और इम्पर्सोनेशन से जुड़ी चिंताओं को कैसे दूर कर रहे हैं. WhatsApp को भेजे नोटिस में सरकार ने चिंता जताई थी कि प्रस्तावित यूज़रनेम फ़ीचर से ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम और इम्पर्सोनेशन हमलों के मामलों में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि इससे गलत इरादे वाले लोग पीड़ितों से संपर्क कर सकते हैं और उन्हें मैसेज भेज सकते हैं. साथ ही Meta से यह बताने को कहा गया था कि WhatsApp के नए फ़ीचर, जिससे साइबर अपराध बढ़ सकते हैं, के लिए IT एक्ट और नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए.

व्हॉट्सएप ने जारी किया था बयान

केंद्र ने Meta को यह भी याद दिलाया कि एक अहम सोशल मीडिया मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) होने के नाते, WhatsApp IT एक्ट और नियमों के तहत 'ड्यू डिलिजेंस' (उचित सावधानी) की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य है. बुधवार को एक बयान में WhatsApp ने इस फीचर का बचाव करते हुए कहा कि इसमें स्कैम और इम्पर्सोनेशन को रोकने और यूज़र्स की सुरक्षा के लिए पहले से ही सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाज़ार है और 50 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स के साथ, Telegram की तुलना में यहां इसका यूज़र बेस काफ़ी बड़ा है.

सरकार ने लगाया था प्रतिबंधन

पिछले महीने, धोखाधड़ी, इम्पर्सोनेशन और संवेदनशील कंटेंट के प्रसार से जुड़ी चिंताओं के कारण भारत में Telegram नियामक जांच के दायरे में आ गया था. भारत सरकार ने Telegram और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने कहा था कि प्लेटफ़ॉर्म लीक हुए और फ़र्ज़ी नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा के पेपर, भ्रामक कंटेंट और देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के प्रसार को रोकने में नाकाम रहा. हालांकि, एक हफ़्ते के सरकारी प्रतिबंध की अवधि खत्म होने के बाद यह इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म भारत में फिर से चालू हो गया.

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