- दिपके ने कहा- CJP और उसके सदस्यों की सरकार से मिलने की कोई योजना नहीं है
- कहा- अगर सरकार बातचीत करना चाहती है तो किसी न्यूट्रल जगह पर आए
- सीजेपी ने 24 जुलाई को देशभर में प्रदर्शन का ऐलान किया है
नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहा विरोध-प्रदर्शन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक शिक्षा मंत्री पद नहीं छोड़ते और जिम्मेदारी नहीं लेते. ये बात NDTV के शिव अरूर से बातचीत में सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कही. उन्होंने कहा कि CJP और उसके सदस्यों की सरकार से मिलने की कोई योजना नहीं है, जब तक कि नेता बातचीत के लिए जंतर-मंतर या किसी "न्यूट्रल जगह" पर आने के लिए तैयार न हों.
दिपके ने कहा, "उन्होंने हमें बातचीत के लिए बुलाया था- लेकिन पिछली बार उन्होंने हमें बातचीत के लिए बुलाया और सीजेपी के प्रवस्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच घंटे तक बिठाए रखा. उन पांच घंटों में उन्होंने सिर्फ़ 10 मिनट ही बात की." उन्होंने आगे कहा कि वे उस अनुभव को दोबारा नहीं दोहराना चाहते. दिपके ने कहा, "हम अब ऐसा नहीं करना चाहते, क्योंकि वे बस हमारा समय बर्बाद कर रहे थे. इसलिए अगर सरकार बातचीत करना चाहती है तो यह किसी मंत्री के घर पर नहीं होगी. यह या तो जंतर-मंतर पर होगी या किसी न्यूट्रल जगह पर होगी.
'धर्मेंद्र प्रधान को जंतर-मंतर पर हमारे साथ जुड़ना चाहिए'
ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ बोलते हुए युवा धर्मेंद्र प्रधान की एक पुरानी तस्वीर के बारे में पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्हें जंतर-मंतर पर हमारे साथ जुड़ना चाहिए. हम उनका स्वागत करेंगे. हम उनका इस्तीफा पत्र भी तैयार कर देंगे. उन्हें बस उस पर हस्ताक्षर करने होंगे."
#IndiaMatters with @ShivAroor
— NDTV (@ndtv) July 23, 2026
"If the government wants to have a talk, it won't be happening in any of the minister's house. It will either happen at Jantar Mantar or at any neutral location": CJP founder @abhijeet_dipke pic.twitter.com/tUKDkpzCXm
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान पर क्या बोले दिपके?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीट पेपर लीक मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने के ऐलान का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा, "वह असल दोषी यानी धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ किसी ठोस कार्रवाई के बिना किया गया एक बहुत ही अस्पष्ट ट्वीट था. हमारी मांग बहुत सीधी और साफ है- शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. धर्मेंद्र प्रधान को बचाने के लिए जंतर-मंतर पर और खून नहीं बहना चाहिए, क्योंकि वे पहले ही 20 से ज़्यादा छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं." दीपके ने कहा कि विरोध प्रदर्शन दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये दूर-दूर तक फैल गया है. उन्होंने सरकार से "लोगों की बात सुनने" को कहा है.
'लाखों छात्रों से ज़्यादा ज़रूरी एक शिक्षा मंत्री नहीं हो सकता'
दीपके ने जंतर-मंतर पर समर्थकों के बीच NDTV से कहा, "मुंबई, नासिक, मिजोरम, जयपुर, मध्य प्रदेश, बैंगलोर- पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. तो जब लाखों लोग मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं, तो मुझे समझ नहीं आता कि पीएम मोदी के लिए एक शिक्षा मंत्री को हटाना इतनी बड़ी समस्या क्यों है? लाखों छात्रों से ज़्यादा ज़रूरी एक शिक्षा मंत्री नहीं हो सकता."
उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही तय करने के बारे में है. उन्होंने आगे कहा कि प्रधान के बाद जो भी आएगा, उसे पता होगा कि अगर वह "गड़बड़ करता है, पेपर लीक होता है या कोई भी छात्र आत्महत्या करता है, तो उसकी कुर्सी सुरक्षित नहीं रहेगी"
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