- कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को टाइफाइड हो गया है, इसकी जानकारी उन्होंने एक्स पर दी.
- हालांकि दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक लड़ाई जारी रहेगी.
- दूसरी ओर आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो कठोर फैसला लेंगे.
Abhijeet Dipke Typhoid: पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को टाइफाइड हो गया है. उन्होंने इस बात की जानकारी खुद सोशल मीडिया पोस्ट पर दी. दीपके ने एक्स पोस्ट पर साझा किए गए वीडियो के साथ उन्होंने लिखा कि मुझे टाइफाइड हो गया है. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने वीडियो में कहा कि मेरी तबीयत खराब थी. जिसकी जांच रिपोर्ट अब आ गई है. जांच रिपोर्ट में मुझे टाइफाइड बताया गया है. जिसका इलाज चल रहा है. सुबह-शाम इलाज चल रहा है.
Have been diagnosed with typhoid, but the fight will go on until Dharmendra Pradhan resigns! pic.twitter.com/8iHSZdF6K7
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 25, 2026
भूख हड़ताल पर भी थे दीपके, बिगड़ी थी तबीयत
मालूम हो कि पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में दीपके शुरू से शामिल हैं. बीते 20 जुलाई को जब दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से ले गई थी, तब दीपके ने भूख हड़ताल का ऐलान किया था. इस बीच उनकी तबीयत खराब हो गई थी. जिसकी उन्होंने डॉक्टरों से जांच कराई, अब जांच रिपोर्ट में दीपके को टाइफाइड होने की पुष्टि हुई है.
दीपके के तबीयत खराब होने से प्रदर्शन पर असर पड़ने की बात की जा रही है, हालांकि इसकी संभावना कम ही है. दूसरी ओर आज इस मामले में सरकार और कॉकरोज जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बातचीत होनी है.
CJP प्रवक्ता रांका बोले- प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो कठोर फैसला लेंगे
सरकार और CJP से बातचीत के बारे में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, "कल की मीटिंग में हमें मुआवज़े और कानूनी मामलों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. हमें सैद्धांतिक सहमति मिल गई है और उम्मीद है कि आज लिखित समझौता भी मिल जाएगा. हालांकि, हमारी मुख्य मांग- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई ठोस फ़ैसला नहीं हुआ है.
रांका ने आगे कहा कि असल में, कल हमने मुख्यधारा की मीडिया में सूत्रों के हवाले से देखा कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देंगे. अगर वे इस्तीफ़ा नहीं देने वाले हैं, तो इन मीटिंग्स का कोई मतलब नहीं है. ऐसे में, हम अपनी अगली रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे. अगर सरकार अड़ी रहती है और कहती है कि प्रधान इस्तीफा नही देंगे तो हम भी कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होंगे.
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