भारत में गिग इकॉनमी को लेकर चल रही बहस अब और तेज होती दिख रही है. दरअसल इस मुद्दे पर जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल और आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा के बीच शुरू हुई बहस में अब अरबपति बिजनेसमैन और इंफो एज (नौकरी डॉट कॉम) के फाउंडर संजीव बिखचंदानी भी कूद पड़े हैं. बिखचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गोयल का समर्थन करते हुए राघव चड्ढा पर तीखा तंज कसा, जिसने इस विवाद को और गरमा दिया है.
गिग इकॉनमी पर गोयल का पक्ष (Deepinder Goyal on Gig Economy)
दीपिंदर गोयल ने X पर लिखे अपने लंबे पोस्ट में कहा कि गिग इकॉनमी ने उन लोगों के सामने असमानता की सच्चाई रख दी है, जो पहले इसे देखे बिना ही अपनी जिंदगी जी रहे थे. उन्होंने कहा कि गिग इकॉनमी ने कामगार वर्ग और उनकी मेहनत को साफ तौर पर सामने ला दिया है.
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बिखचंदानी का समर्थन और तीखा तंज (Bikhchandani Backs Goyal, Takes a Dig)
संजीव बिखचंदानी ने गोयल की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा कि “हर शब्द सच है.” इसके बाद उन्होंने बिना नाम लिए राघव चड्ढा पर निशाना साधा. बिखचंदानी ने लिखा कि एक “शैंपेन सोशलिस्ट”, जिसने फिल्म स्टार से शादी की, उदयपुर में डिजाइनर वेडिंग की और मालदीव में पहली वेडिंग एनिवर्सरी मनाई, वह गिग वर्कर्स के शोषण पर “मगरमच्छ के आंसू” बहा रहा है. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा-“Aam Aadmi my foot.”
Very well written @deepigoyal Every word is true. It beggars belief that a Champagne Socialist who married a film star and had a designer wedding in Udaipur and a first wedding anniversary in Maldives has the audacity to then shed crocodile tears around alleged exploitation of… https://t.co/pgcTa0hwKy
— Sanjeev Bikhchandani (@sbikh) January 2, 2026
राघव चड्ढा का आरोप (Raghav Chadha's Allegations)
नए साल की पूर्व संध्या पर राघव चड्ढा ने दिल्ली में जोमैटो, स्विगी और अन्य फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी राइडर्स के साथ समय बिताया था. उन्होंने कहा कि इन कंपनियों की सफलता सिर्फ एल्गोरिदम की वजह से नहीं, बल्कि इंसानी मेहनत और पसीने से हुई है. चड्ढा ने आरोप लगाया कि गिग इकॉनमी को “शोषण-मुक्त” बनाना जरूरी है और कंपनियों को डिलीवरी पार्टनर्स को इंसान की तरह ट्रीट करना चाहिए, न कि डेटा पॉइंट की तरह.
I sat down with delivery riders of Zomato, Swiggy, Blinkit etc. This is not a rant. This is a conversation with those whose lives power our everyday comfort.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) January 2, 2026
It's tragic that millions of delivery riders who helped build instant-commerce companies into what they are today, are… pic.twitter.com/lcFKE8srfu
अरबपतियों की दौलत भी चर्चा में (Net Worth Adds to the Debate)
इस बहस में दोनों उद्योगपतियों की नेट वर्थ भी चर्चा का विषय बनी हुई है. संजीव बिखचंदानी की कुल संपत्ति करीब 2.4 अरब डॉलर बताई जाती है, जबकि फोर्ब्स के मुताबिक दीपिंदर गोयल की नेट वर्थ लगभग 1.7 अरब डॉलर है.
गिग इकॉनमी पर यह बहस सिर्फ कंपनियों और नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कामगारों के अधिकार, सामाजिक असमानता और नैतिक जिम्मेदारी जैसे बड़े सवाल भी खड़े करती है. आने वाले समय में यह मुद्दा और गहराने की संभावना है.
गिग वर्कर्स यूनियन ने रखा अपना पक्ष
गिग कमर्चारियों के काम करने और भुगतान पर छिड़ी बहस के बीच गिग वर्कर्स यूनियन ने जोमैटो सीईओ दीपिंदर गोयल के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी के डिलीवरी मॉडल का बचाव किया गया था. तेलंगाना बेस्ड यूनियन ने कहा कि जमीनी स्थिति बहुत अलग है.
गिग वर्कर्स यूनियन का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब हाल ही में गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया था कि कैसे जोमैटो और ब्लिंकइट के डिलीवरी पार्टनर्स कमाई करते हैं. उन्होंने बताया कि 2025 में डिलीवरी पार्टनर्स (टिप्स को छोड़कर) औसतन 102 रुपए प्रति घंटा कमाए, जो पिछले वर्ष की मुकाबले में 10.9 प्रतिशत अधिक है.
गोयल ने कहा कि डिलीवरी पार्टनर अपने काम के घंटे खुद चुनने के लिए स्वतंत्र हैं, ग्राहकों से मिलने वाली पूरी टिप उन्हें मिलती है और 10 मिनट डिलीवरी सर्विसेज में उन्हें असुरक्षित ड्राइविंग करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है. उन्होंने कंपनी द्वारा दी जाने वाली बीमा कवरेज और पेंशन सहायता जैसी सुविधाओं के बारे में भी बताया।
गोयल के इन दावों को खारिज करते हुए तेलंगाना गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स एसोसिएशन (टीजीपीडब्लूए) ने कहा कि जमीनी स्थिति राइडर्स के लिए काफी अलग है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की एक पोस्ट में यूनियन ने कहा कि ईंधन, वाहन रखरखाव और अन्य खर्चों को घटाने के बाद, वास्तविक कमाई घटकर लगभग 81 रुपए प्रति घंटा रह जाती है.
एसोसिएशन के अनुसार, 26 दिनों तक प्रतिदिन 10 घंटे काम करने वाला डिलीवरी पार्टनर लगभग 21,000 रुपए प्रति माह कमाएगा. एसोसिएशन ने यह भी बताया कि डिलीवरी पार्टनर्स कोपेड लीव, सामाजिक सुरक्षा लाभ या दुर्घटना बीमा की गारंटी नहीं मिलती है.
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