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कर्मचारी के इस्तीफे का 30 साल पुराना केस, IAS पर गिरी गाज... हाई कोर्ट ने लगाया 1 लाख का जुर्माना

अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछली सुनवाई में भी अंतिम मौका दिया गया था और चेतावनी दी गई थी कि हलफनामा दाखिल न करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. (हरियाणा से गुरप्रीत चिन्ना की रिपोर्ट)

कर्मचारी के इस्तीफे का 30 साल पुराना केस, IAS पर गिरी गाज... हाई कोर्ट ने लगाया 1 लाख का जुर्माना
हरियाणा हाई कोर्ट ने IAS पर लगाया जुर्माना
Haryana:

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अवमानना से जुड़े एक सेवा विवाद में कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा के IAS अधिकारी मुकुल कुमार को लंबित पालना रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया है. हालांकि, इस बार अदालत ने इसे 1 लाख रुपये के जुर्माने की शर्त से जोड़ दिया है, जो सीधे उनके वेतन से काटा जाएगा. पंचकूला निवासी बी.बी. गुप्ता द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने यह आदेश पारित किया. 

अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछली सुनवाई में भी अंतिम मौका दिया गया था और चेतावनी दी गई थी कि हलफनामा दाखिल न करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. बावजूद इसके अनुपालन नहीं हुआ, जिसके चलते अब जुर्माना अनिवार्य कर दिया गया है.

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि वसूली गई राशि का आधा हिस्सा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन को और शेष आधा हाई कोर्ट कर्मचारी कल्याण कोष में जमा किया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद हैफेड (HAFED) के एक पूर्व कर्मचारी की सेवा से जुड़ा है, जिसमें इस्तीफे को लेकर कानूनी पेच पैदा हुआ. याचिकाकर्ता के अनुसार, उसका इस्तीफा पहले स्वीकार नहीं किया गया था और उसने बाद में उसे वापस भी ले लिया था. इसके बावजूद सक्षम प्राधिकारी ने करीब 30 वर्ष पहले उसे पूर्व प्रभाव से स्वीकार कर लिया.

पहले क्या कहा था कोर्ट ने?

इस मामले में पहले जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी ने अहम फैसला देते हुए कहा था कि इस्तीफा तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार न किया जाए. अदालत ने 6 सितंबर 1994 के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर और विधि सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया था.

कोर्ट ने साफ किया कि सेवा नियमों में पूर्व प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार करने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए पिछली तारीख से इस्तीफा स्वीकार करना अवैध है. साथ ही, याचिकाकर्ता को सेवा में मानते हुए 50% बकाया वेतन देने का निर्देश भी दिया गया.

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