- देशभर में मॉनसून की बारिश में सुधार हुआ है, जिससे जुलाई की शुरुआत में बारिश की कमी घटकर 15 प्रतिशत रह गई है
- गुजरात में जून महीने के अंत तक बारिश में कमी 48 प्रतिशत से घटकर अब 73प्रतिशत हो गई है
- मुंबई में जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है,
दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई राज्यों में मॉनसून जमकर बरस रहा है. मौसम विभाग लगातार भारी बारिश का अलर्ट जारी कर रहा है. पिछले दो दिन में बारिश और ज्यादा बढ़ गई है. कुछ दिन पहले तक मौसम वैज्ञानिक बारिश की कमी और अल-नीनो को लेकर चिंता जता रहे थे. जुलाई महीने की शुरुआत से पहले तक देश में बारिश की कमी 38 फीसदी तक थी. लेकिन हफ्तेभर की बारिश के बाद यह घटकर 15 फीसदी रह गई है. सबसे ज्यादा कम बारिश गुजरात में हुई थी. जून महीने के अंत तक वहां सामान्य से 82 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी. लेकिन पिछले दो दिनों से भारी बारिश के बाद यह कमी घटकर 53 फीसदी रह गई है.
गुजरात में दो दिन की बारिश ने बदली कहानी
मौसम विभाग के अनुसार, 30 जून तक गुजरात में औसत 110.8 मिमी बारिश होनी चाहिए. लेकिन राज्य में सिर्फ 20.5 मिमी ही बारिश दर्ज की गई. यानी गुजरात में जून तक 82 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई. इसी के साथ गुजरात देश के सबसे कम बारिश वाले राज्य में शामिल हो गया था. हालांकि जुलाई के पहले ही हफ्ते में कहानी पलट गई. दो दिन में गुजरात में जमकर बारिश हुई. पिछले 24 घंटे में ही गुजरात में 20.9 मिमी बारिश दर्ज की गई. इसी के साथ अब राज्य में बारिश की कमी घटकर 53.4 रह गई है.

मुंबई में सामान्य से 78 फीसदी ज्यादा बारिश
पिछले कुछ दिनों के दौरान मुंबई, पुणे और महाराष्ट्र के कई इलाकों में मॉनसून की रिकॉर्ड बारिश रिकॉर्ड की गई है. भारत मौसम विभाग के मुंबई केंद्र के अनुसार 1 जून से 8 जुलाई (सुबह 08.30 बजे) के बीच मुंबई के कोलाबा इलाके में कुल 1383.8 mm बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य से 78.4% ज्यादा है, जबकि सांताक्रूज इलाके में इस दौरान 1530.2 mm बारिश रिकॉर्ड की गई है जो औसतन यहां होने वाली बारिश से 94.4% ज्यादा है.

1 जुलाई से 7 जुलाई तक कितनी बारिश
Photo Credit: IMD
हफ्तेभर में बारिश की कमी 23% तक घटी
भारत मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जून से 1 जुलाई 2026 के बीच देशभर में बारिश औसत से 38% कम रिकॉर्ड की गई थी, लेकिन पिछले एक हफ्ते में मॉनसून के रफ्तार पकड़ने से बारिश की कमी 23% तक घट गई है.
मॉनसून ने ऐसे समय पर रफ़्तार पकड़ी है जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो के असर को लेकर देश में चिंता बढ़ रही थी.

क्या बोले एक्सपर्ट्स?
भारत मौसम विभाग के पूर्व डायरेक्टर जनरल और जाने-माने मौसम वैज्ञानिक, के.जे. रमेश ने एनडीटीवी से कहा, 'अल नीनो का बारिश पर पूरे मॉनसून पर असर पड़े यह जरूरी नहीं है. पिछले कुछ दिनों के दौरान अल नीनो का असर मॉनसून के इस सक्रिय फेज में नहीं हुआ क्योंकि अरब सागर और हिंद महासागर दोनों में अभी वार्मिंग है. इसकी वजह से वाष्पीकरण होकर ज्यादा नमी भारत की तरफ आ रही है. पीछे दस दिनों के दौरान वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से एक मध्य-क्षोभमंडलीय चक्रवात(MTC) बना है. ठीक इसी समय बंगाल की खाड़ी में एक दबाव बना है. ये दोनों एक दूसरे को फीड करते रहे, जिसकी वजह से गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र से लेकर ओडिशा तक अच्छी बारिश हुई है.'
भारत मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान रिपोर्ट के मुताबिक, 'उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश एवं उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश पर बने सुस्पष्ट निम्न दाब क्षेत्र के प्रभाव से 8 जुलाई को पश्चिम मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम, कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र तथा असम एवं मेघालय में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है.' हालांकि 9 जुलाई से देश के मध्य हिस्सों में वर्षा की गतिविधियों में फिर काफी कमी आने की संभावना है.
मॉनसून में सुधार से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178
पिछले एक हफ्ते के दौरान देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून बेहद सक्रिय हो गया है. इसकी वजह से महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश, ओडिशा तक कई हिस्सों में तेज बारिश रिकॉर्ड की गयी है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की वजह से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है. सरकार को उम्मीद है कि जुलाई में बारिश और रफ्तार पकड़ेगी, जिससे खरीफ बुवाई में तेजी आएगी.

हालांकि देश के कई हिस्सों में इस मॉनसून सीजन के दौरान अब तक औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है. देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम हैं. इसकी वजह से महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुआई पर असर पड़ रहा है. केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में विशेष निगरानी रखी जा रही है.
कृषि मंत्री शिवराज सिंह के मुताबिक, "देश में फिलहाल 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम है. मॉनसून में देरी का असर सोयाबीन और कपास पर पड़ा है, लेकिन किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि और कम पानी वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है. सरकार ने इस चुनौती के लिए पहले ही अप्रैल से तैयारी शुरू कर दी थी. आईसीएआर के सहयोग से प्रभावित होने की संभावना वाले जिलों के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार कर राज्यों के साथ साझा किए गए हैं."
सरकार की तैयारी
- किसी भी स्थिति में बुवाई प्रभावित न हो इसके लिए करीब 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है.
- किसान क्रेडिट कार्ड अभियान के तहत 30 जून तक 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक को स्वीकृति दी जा चुकी है.
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाया जायेगा ताकि नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
यह भी पढ़ें: कल का मौसम: दिल्ली-NCR से लेकर यूपी-राजस्थान तक, जमकर बरसेगा मॉनसून, IMD का अलर्ट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं