- मोनू मेटुरबाला ने मां की बीमारी ठीक होने पर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों की दौड़कर यात्रा करने का संकल्प लिया था
- मां लालती देवी की तबीयत मछली का कांटा फंसने से बिगड़ी थी, जिससे परिवार में चिंता और आर्थिक दबाव बढ़ गया था
- मोनू ने मार्च 2026 में यात्रा शुरू की और अब तक लगभग आठ हजार किलोमीटर की दौड़ पूरी कर चुके हैं
पटना का रहने वाला मोनू मेटुरबाला कभी क्रिकेट खेलता था, पढ़ाई करता था और गोलगप्पे-चाट बेचने के साथ बिजली मिस्त्री का काम भी करता था. लेकिन जब मां लालती देवी की तबीयत बिगड़ी, तो उसकी जिंदगी का मकसद बदल गया. मां के ठीक होने की प्रार्थना करते हुए उसने भगवान शिव से मन्नत मांगी कि अगर मां स्वस्थ हो गईं, तो वह दौड़कर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करेगा. मां की तबीयत सुधरी तो 19 साल के मोनू ने अपना वादा निभाने के लिए घर छोड़ दिया. अब वह हजारों किलोमीटर की यात्रा पर है. मां की तबीयत खराब हो जाए तो घर का माहौल बदल जाता है. परिवार के हर सदस्य को चिंता सताने लगती है. घर में हंसी-मजाक की जगह दवाइयों और इलाज की चर्चा होने लगती है.
ऐसे समय में हर कोई यही चाहता है कि किसी तरह उसका अपना स्वस्थ हो जाए. कोई डॉक्टरों के भरोसे रहता है, कोई दुआ करता है और कोई भगवान के सामने हाथ जोड़कर अपने प्रियजन की सलामती मांगता है. बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले 19 वर्षीय मोनू मेटुरबाला की कहानी भी ऐसी ही एक प्रार्थना से शुरू होती है. लेकिन उनकी प्रार्थना के साथ एक ऐसा संकल्प जुड़ गया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. मोनू ने भगवान शिव से अपनी मां लालती देवी के स्वस्थ होने की मन्नत मांगी थी.
-
चीन पर इतनी निर्भरता भारत के लिए ठीक नहीं- NDTV World Summit में बोले शशि थरूर -
दिल्ली एयरपोर्ट से होती है दुनिया में सबसे ज्यादा Uber बुकिंग, NDTV ग्लोबल समिट में डोमिनिक टेलर ने खोले राज -
Gen-Z को कैसे समझाएं? BAPS के ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने बताया तरीका -
NDTV World Summit: हिंदू धर्म को क्यों किया जाता है टारगेट? BAPS के ब्रह्मविहारी स्वामीजी का जवाब -
एफिल टावर में विवाद का पूरा सच, BAPS के ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने NDTV को बताया -
NDTV World Summit 2026 | दुनिया में सबसे ज्यादा कहां होती है UBER बुकिंग, डोमिनिक टेलर ने खोले राज -
NDTV World Summit | खामेनेई, मिनाब स्कूल पर हमले, भारत से दोस्ती पर क्या-क्या बोले ईरानी राजनयिक -
AI ने बनाया प्लान और इंसान ने दबाया हमले का बटन, ईरानी स्कूल में 156 मौतों पर पूर्व CIA चीफ ने कही ये बात -
इस साल के अंत तक भारत आ सकते हैं नेपाली पीएम बालेन शाह, नेपाल के वित्तमंत्री डॉ स्वर्णिम वाग्ले ने दी जानकारी -
नोबेल विजेताओं जैसी दिमागी ताकत और पलक झपकते ही मौत! CIA के पूर्व प्रमुख ने AI युद्ध पर दी सबसे खौफनाक चेतावनी
उन्होंने मन ही मन तय किया कि अगर उनकी मां ठीक हो गईं, तो वह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए दौड़ते हुए यात्रा करेंगे. मां की तबीयत में सुधार हुआ, तो मोनू ने अपनी मन्नत को सिर्फ एक भावुक इच्छा बनकर नहीं रहने दिया. उन्होंने उसे पूरा करने का फैसला किया और लंबी दूरी की कठिन यात्रा पर निकल पड़े. आज मोनू की यात्रा केवल धार्मिक आस्था की कहानी नहीं है. यह एक बेटे के अपनी मां से लगाव, परिवार की मुश्किल परिस्थितियों और एक युवा के अपने संकल्प को पूरा करने की कोशिश की कहानी भी है.
मां की बीमारी ने बदल दी मोनू की जिंदगी
मोनू की मां लालती देवी बताती हैं कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. उनके मुताबिक, मछली खाने के बाद उनके गले में मछली का कांटा फंस गया था. इसके बाद परिवार के लोग काफी परेशान हो गए. कई जगह इलाज कराया गया, लेकिन परेशानी दूर नहीं हो रही थी. घर में सभी लोग उनकी सेहत को लेकर चिंतित थे. परिवार के लिए यह समय आसान नहीं था. एक तरफ मां की बीमारी की चिंता थी, तो दूसरी तरफ इलाज के लिए प्रयास जारी थे. मोनू अपनी मां की परेशानी देख रहे थे. उस उम्र में, जब ज्यादातर युवा क्रिकेट, पढ़ाई, दोस्तों और अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं, तब मोनू के मन में अपनी मां को स्वस्थ देखने की इच्छा सबसे बड़ी हो गई.
मां की बीमारी के दौरान ही उन्होंने भगवान शिव के सामने एक संकल्प लिया. उन्होंने तय किया कि अगर उनकी मां ठीक हो जाती हैं, तो वह 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए दौड़कर यात्रा करेंगे. मोनू के बड़े भाई सोनू कुमार बताते हैं कि जब उनकी मां की तबीयत खराब हुई थी, तब परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी. ऐसे समय में मोनू ने जहानाबाद के बराबर पहाड़ स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में मन्नत मांगी थी. उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि उनकी मां स्वस्थ हो जाएं, तो वह दौड़कर 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करेंगे.
मां ने कहा- मेरा बेटा मन्नत पूरी करने निकला है
मोनू की मां लालती देवी अपने बेटे की इस यात्रा को लेकर भावुक हैं. वह कहती हैं कि जब उनकी तबीयत खराब थी, तब परिवार के सभी लोग परेशान थे. मोनू ने भगवान से मन्नत मांगी थी कि मां ठीक हो जाएंगी, तो वह 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने जाएगा. लालती देवी के मुताबिक, जब उनकी तबीयत में सुधार हुआ, तो मोनू अपनी मन्नत पूरी करने के लिए यात्रा पर निकल गया। मां के लिए यह गर्व की बात है कि उनका बेटा अपनी कही हुई बात निभाने के लिए इतनी लंबी दूरी तय कर रहा है.
वह चाहती हैं कि दूसरे बच्चे भी अपने माता-पिता को सुख दें और उनका ख्याल रखें. उनके लिए बेटे की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल हजारों किलोमीटर दौड़ना नहीं, बल्कि परिवार के प्रति उसका लगाव और अपनी बात पर कायम रहना है. एक मां के लिए इससे बड़ी राहत क्या होगी कि बीमारी के समय जिस बेटे ने उसके स्वस्थ होने की प्रार्थना की, वही बेटा आज उसकी सलामती के लिए मांगी गई मन्नत को पूरा करने में जुटा है. मोनू की कहानी में मां की भूमिका केवल उस वजह तक सीमित नहीं है, जिसके कारण यात्रा शुरू हुई। उनकी मां ही इस पूरी यात्रा की भावनात्मक केंद्र हैं। मोनू जहां भी पहुंचते हैं, उनके संकल्प के पीछे वही पुरानी याद है, जब घर में सभी लोग उनकी मां की सेहत को लेकर चिंतित थे.
क्रिकेट खेलते थे मोनू, अब दौड़ रहे हैं उनके कदम
मोनू हमेशा से सक्रिय जीवन जीने वाले युवा रहे है, उनके बड़े भाई सोनू कुमार बताते हैं कि मोनू छठी कक्षा से ही क्रिकेट खेलते थे. खेल के कारण वह अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखते थे. क्रिकेट उनके जीवन का अहम हिस्सा था और वह पढ़ाई भी करते थे. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मोनू ने छोटे-मोटे काम भी किए. वह गोलगप्पे और चाट बेचते थे. इसके अलावा बिजली मिस्त्री के काम में भी हाथ बंटाते थे. उनके पिता महेश चौहान भी बिजली मिस्त्री का काम करते हैं और परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हैं.
मोनू के पिता महेश चौहान बताते हैं कि उनके बेटे में बचपन से ही भगवान के प्रति आस्था थी. लेकिन उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा एक दिन दौड़ते हुए 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने निकल जाएगा. महेश चौहान कहते हैं कि शुरुआत में जब मोनू पटना से यात्रा पर निकले, तो परिवार ने उन्हें खर्च के लिए कुछ पैसे दिए थे. अब उनके मुताबिक, मोनू अपनी यात्रा का खर्च खुद संभालने की कोशिश कर रहे हैं. पिता के लिए यह अनुभव गर्व और हैरानी, दोनों से भरा है. जिस बेटे को उन्होंने बड़े होते देखा, जिसे क्रिकेट खेलते और काम करते देखा, वही बेटा अब अपने संकल्प के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में सफर कर रहा है.
15 मार्च 2026 को शुरू हुई यात्रा, हजारों किलोमीटर का सफर
मोनू की यात्रा 15 मार्च 2026 को शुरू हुई थी. जानकारी के मुताबिक, वह अब तक लगभग 8,000 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं. यात्रा की शुरुआत में उनका पहला प्रमुख पड़ाव झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम था. इसके बाद उन्होंने आगे बढ़ते हुए दूसरे ज्योतिर्लिंगों की ओर अपनी यात्रा जारी रखी. मोनू प्रतिदिन करीब 50 किलोमीटर दौड़ने का लक्ष्य लेकर चलते हैं. हालांकि, इतनी लंबी यात्रा में हर दिन एक जैसी परिस्थितियां नहीं होतीं. रास्ते, मौसम, शारीरिक थकान और ठहरने की व्यवस्था जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं.
एक दिन में लगभग 50 किलोमीटर दौड़ना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी शारीरिक चुनौती है. लगातार कई दिनों और महीनों तक इस तरह की यात्रा जारी रखने के लए फिटनेस के साथ-साथ धैर्य और मानसिक दृढ़ता भी जरूरी है. मोनू की यात्रा की खास बात यह है कि वह अपने संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार आगे बढ़ रहे हैं. उनके परिवार के अनुसार वह फिलहाल महाराष्ट्र में हैं उनकी यात्रा में दो अन्य युवक भी साथ रहते हैं, जिनसे उन्हें रास्ते में साथ और सहयोग मिलता है.
छह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का दावा, यात्रा अभी जारी
मोनू के पिता महेश चौहान के मुताबिक, उनका बेटा अब तक छह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुका है. परिवार को उम्मीद है कि वह अपने संकल्प के अनुसार बाकी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी पूरे करेगा. 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की यात्रा भारत के अलग-अलग राज्यों और लंबी दूरियों से होकर गुजरती है. ऐसे में इस संकल्प को पूरा करने के लिए केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि समय, शारीरिक क्षमता और यात्रा की योजना भी जरूरी है. मोनू ने जिस समय यह मन्नत मांगी थी, उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चिंता अपनी मां की सेहत थी. अब जब वह यात्रा पर हैं, तो उनके सामने अपने वादे को पूरा करने की चुनौती है.
उनके पिता कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है. वह मानते हैं कि आस्था और लगन के साथ मोनू यात्रा कर रहा है. परिवार के लिए यह संतोष की बात है कि बेटे ने अपनी मन्नत को याद रखा और उसे पूरा करने की कोशिश कर रहा है. मोनू के पिता ने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इतनी लंबी दूरी दौड़कर तय करेगा. लेकिन आज वही यात्रा परिवार के लिए गर्व की वजह बन गई है. मां की बीमारी के बाद भी परिवार की मुश्किलें कम नहीं थीं. मोनू की कहानी का एक अहम पहलू उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी है. महेश चौहान बिजली मिस्त्री का काम करते हैं. परिवार के दूसरे सदस्य भी काम करके घर की जिम्मेदारियां संभालते हैं. मोनू खुद भी छोटे-मोटे काम करते थे, लेकिन अभी वह यात्रा पर निकले हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं