- पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए खुद को अकेली लड़ाकू बताया है
- ममता बनर्जी ने कहा कि दिल्ली की ताकत से बंगाल की जनता को प्रभावित करना और चुनाव जीतना संभव नहीं है
- तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार विधानसभा चुनाव में 226 से अधिक सीटें जीतेगी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए खुद को “अकेली लड़ाकू” बताया. बीरभूम जिले के सूरी में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया कि देश के 19 राज्य और केंद्र सरकार उनके खिलाफ एकजुट हो गए हैं, लेकिन वह अकेले ही आम लोगों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं.
'दिल्ली की ताकत से बंगाल नहीं जीता जा सकता'
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास देश के 19 राज्यों में सरकार है, लेकिन इसके बावजूद वे पश्चिम बंगाल में जीत हासिल नहीं कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतों और दिल्ली से आने वाले संसाधनों के दम पर बंगाल की जनता को प्रभावित करना आसान नहीं है. ममता ने कहा, 'दिल्ली से ताकत लाकर बंगाल को नहीं जीता जा सकता. यहां की जनता सब समझती है और अपना फैसला खुद लेती है.'
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226 सीटों का बड़ा दावा
अपनी पार्टी की जीत को लेकर ममता बनर्जी ने आत्मविश्वास से भरा दावा भी किया. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में 226 से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता में वापसी करेगी. यह दावा न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने वाला है, बल्कि विपक्ष के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है कि टीएमसी इस चुनाव को पूरी ताकत से लड़ रही है.

'मन की बात' पर भी सवाल
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम 'मन की बात' को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम का इस्तेमाल युवाओं के दिमाग को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 'मन की बात के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है, लेकिन बंगाल के युवा जागरूक हैं और सच-झूठ में फर्क समझते हैं.'
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'मैं आम लोगों के लिए लड़ रही हूं'
अपने भाषण में ममता बनर्जी ने खुद को आम जनता की आवाज के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि उन ताकतों से है जो जनता के अधिकारों को कमजोर करना चाहती हैं. उन्होंने कहा, 'मैं अकेले लड़ रही हूं, लेकिन यह लड़ाई मेरे लिए नहीं, आम लोगों के लिए है.'
चुनाव से पहले तेज हुआ सियासी संग्राम
पश्चिम बंगाल में चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है. एक तरफ बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी खुद को 'बाहरी ताकतों' के खिलाफ बंगाल की पहचान और जनता के हितों की रक्षक के रूप में पेश कर रही हैं.
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'अकेली बनाम सिस्टम' की रणनीति
ममता बनर्जी का यह बयान साफ तौर पर उनकी चुनावी रणनीति को दिखाता है, जहां वह खुद को एक मजबूत लेकिन अकेली नेता के रूप में पेश कर रही हैं, जो पूरे सिस्टम के खिलाफ खड़ी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि यह 'अकेली बनाम 19 राज्य' की राजनीतिक कहानी चुनावी नतीजों में कितना असर डालती है, और ममता बनर्जी का 226 सीटों का दावा हकीकत बन पाता है या नहीं?
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