
अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की दुश्मनी कोई नई बात नहीं है. अक्सर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेता एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं. आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल भी मौका मिलने पर बीजेपी पर जमकर हमले करते हैं और पिछले काफी समय से उनका रुख बीजेपी के प्रति हमलावर है. लेकिन रविवार को अचानक उनके रुख में बेहद आक्रामकता आई और उन्होंने एक ही दिन में दो बार देश की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को बहस के लिए ललकार दिया. आखिर क्या कारण है कि केजरीवाल अमित शाह को लेकर इतने आक्रामक हो गए हैं?
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क्यों आक्रामक हुए केजरीवाल?
1. बीजेपी को घेरने का सही मौका
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी को लगता है कि इस समय बीजेपी और बीजेपी शासित केंद्र सरकार रफाल मामले में बुरी तरह से घिर गई है और जल्द लोकसभा चुनाव आने वाले हैं ऐसे में बीजेपी को घेरने का यही सही समय है.
2. पहला हमला अमित शाह ने किया
दिल्ली के रामलीला मैदान पर आयोजित बीजेपी का पूर्वांचल महाकुंभ, जिसमें अमित शाह मुख्य अतिथि थे वहां पर अमित शाह ने केजरीवाल पर हमला बोला और कहा 'केजरीवाल जी इन चार वर्षों में आपने दिल्ली के लोगों के लिए कितने काम किए है? आपका बस एक ही मंत्र है झूठ बोलना, जोर से बोलना और बार-बार बोलना, मगर इसके आधार पर दिल्ली का विकास नहीं हो सकता. आज दिल्ली का विकास रास्ते से भटक गया है'. जाहिर सी बात है कि जब अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल का नाम लेकर हमला बोला तो अरविंद केजरीवाल ने भी जवाबी हमले में देरी नहीं की और बहस के लिए ललकार दिया.
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3. मोदी की बजाय बीजेपी पर हमला
एक वक्त में अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला किया करते थे, लेकिन बाद में उनको लगा कि इससे उनकी छवि नकारात्मक बन रही है और ऐसी धारणा बन रही है कि अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी के पीछे जबरदस्ती पड़े रहते हैं. इसलिए पंजाब चुनाव 2017 में हार के बाद से अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पहले हमले बिल्कुल ही बंद कर दिए और अब भी अगर हमले करते हैं तो वह एक सीमित दायरे में रहते हैं. लेकिन राजनीति में अगर अपने विरोधी पर जमकर हमले ना करो तो फिर वह राजनीति ही क्या इसलिए अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बजाय बीजेपी या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर अगर हमले किए जाएं, तो बीजेपी को घेरने में आसानी रहेगी और छवि भी नकारात्मक नहीं होगी.
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4. अपनी सरकार के काम
अरविंद केजरीवाल अपने दिल्ली सरकार के काम के प्रति आश्वस्त हैं . उनको लगता है की दिल्ली में सस्ते बिजली-पानी, दुनिया मे चर्चित हो रहे मोहल्ला क्लीनिक, बेहतर हो रहे सरकारी स्कूल और दुनिया मे पहली लागू हुई बार डोर स्टेप डिलीवरी जैसी योजनाओं का प्रचार करके वह लोकसभा चुनाव 2019 में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं . ऐसे में अगर दिल्ली सरकार के काम की चर्चा डिबेट के दौरान हो जाए तो इससे उनको चुनाव में फायदा ही मिलेगा.
5. बड़ी चुनौती देना केजरीवाल की आदत
अरविंद केजरीवाल की शुरुआत से ही आदत है कि वह अपने से बड़े को चुनौती देते हैं . इससे दो फायदे होते हैं अपने से बड़े से लड़कर अगर आप जीत जाएं तो आपका खूब नाम होता है और अगर हार भी जाएं तो सहानुभूति मिलती है. अरविंद केजरीवाल ने जब पहला चुनाव लड़ा तो सीधा तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ नई दिल्ली से. केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया और वह एकदम से भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित नाम में से एक बन गए. लोकसभा चुनाव 2019 में उन्होंने वाराणसी से बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को चुनौती दी. हालांकि, इस चुनाव में केजरीवाल को हार का मुंह देखना पड़ा लेकिन जिस तरह से अरविंद केजरीवाल एक अंजान क्षेत्र से नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ कर दूसरे नंबर पर रहे उससे वह चर्चा में बने रहे. इस समय अमित शाह देश की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया हैं देश के ज़्यादातर राज्यों में बीजेपी की सरकार है और केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार है. जबकि आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार है और पंजाब में वह मुख्य विपक्षी पार्टी है . ऐसे में अमित शाह को बहस के लिए ललकार कर केजरीवाल ने बड़ा दांव खेला है जिससे और कुछ हो ना हो चर्चा तो जरूर होगी.
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क्यों आक्रामक हुए केजरीवाल?
1. बीजेपी को घेरने का सही मौका
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी को लगता है कि इस समय बीजेपी और बीजेपी शासित केंद्र सरकार रफाल मामले में बुरी तरह से घिर गई है और जल्द लोकसभा चुनाव आने वाले हैं ऐसे में बीजेपी को घेरने का यही सही समय है.
2. पहला हमला अमित शाह ने किया
दिल्ली के रामलीला मैदान पर आयोजित बीजेपी का पूर्वांचल महाकुंभ, जिसमें अमित शाह मुख्य अतिथि थे वहां पर अमित शाह ने केजरीवाल पर हमला बोला और कहा 'केजरीवाल जी इन चार वर्षों में आपने दिल्ली के लोगों के लिए कितने काम किए है? आपका बस एक ही मंत्र है झूठ बोलना, जोर से बोलना और बार-बार बोलना, मगर इसके आधार पर दिल्ली का विकास नहीं हो सकता. आज दिल्ली का विकास रास्ते से भटक गया है'. जाहिर सी बात है कि जब अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल का नाम लेकर हमला बोला तो अरविंद केजरीवाल ने भी जवाबी हमले में देरी नहीं की और बहस के लिए ललकार दिया.
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3. मोदी की बजाय बीजेपी पर हमला
एक वक्त में अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला किया करते थे, लेकिन बाद में उनको लगा कि इससे उनकी छवि नकारात्मक बन रही है और ऐसी धारणा बन रही है कि अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी के पीछे जबरदस्ती पड़े रहते हैं. इसलिए पंजाब चुनाव 2017 में हार के बाद से अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पहले हमले बिल्कुल ही बंद कर दिए और अब भी अगर हमले करते हैं तो वह एक सीमित दायरे में रहते हैं. लेकिन राजनीति में अगर अपने विरोधी पर जमकर हमले ना करो तो फिर वह राजनीति ही क्या इसलिए अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बजाय बीजेपी या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर अगर हमले किए जाएं, तो बीजेपी को घेरने में आसानी रहेगी और छवि भी नकारात्मक नहीं होगी.
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4. अपनी सरकार के काम
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5. बड़ी चुनौती देना केजरीवाल की आदत
अरविंद केजरीवाल की शुरुआत से ही आदत है कि वह अपने से बड़े को चुनौती देते हैं . इससे दो फायदे होते हैं अपने से बड़े से लड़कर अगर आप जीत जाएं तो आपका खूब नाम होता है और अगर हार भी जाएं तो सहानुभूति मिलती है. अरविंद केजरीवाल ने जब पहला चुनाव लड़ा तो सीधा तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ नई दिल्ली से. केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया और वह एकदम से भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित नाम में से एक बन गए. लोकसभा चुनाव 2019 में उन्होंने वाराणसी से बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को चुनौती दी. हालांकि, इस चुनाव में केजरीवाल को हार का मुंह देखना पड़ा लेकिन जिस तरह से अरविंद केजरीवाल एक अंजान क्षेत्र से नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ कर दूसरे नंबर पर रहे उससे वह चर्चा में बने रहे. इस समय अमित शाह देश की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया हैं देश के ज़्यादातर राज्यों में बीजेपी की सरकार है और केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार है. जबकि आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार है और पंजाब में वह मुख्य विपक्षी पार्टी है . ऐसे में अमित शाह को बहस के लिए ललकार कर केजरीवाल ने बड़ा दांव खेला है जिससे और कुछ हो ना हो चर्चा तो जरूर होगी.
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