यूपी : बुलंदशहर हिंसा के आरोपी ने जीता पंचायत चुनाव, दंगे में हुआ था इंस्पेक्टर सुबोध सिंह का मर्डर

योगेश राज ने यहां पर पंचायत चुनावों में वार्ड नंबर 5 से चुनाव लड़ा था और निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी निर्दोषी चौधरी को 2,150 वोटों से हराया. योगेश राज चुनाव लड़ने के दौरान जमानत पर बाहर चल रहे थे.

यूपी : बुलंदशहर हिंसा के आरोपी ने जीता पंचायत चुनाव, दंगे में हुआ था इंस्पेक्टर सुबोध सिंह का मर्डर

UP पंचायत चुनावों के नतीजों की सोमवार को घोषणा हुई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बुलंदशहर:

साल 2018 में हुई बुलंदशहर हिंसा में गिरफ्तार हुए बजरंग दल के पूर्व कार्यकर्ता योगेश राज को पंचायत चुनावों में जिले में जीत मिली है. योगेश राज पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था. यह हिंसा इतनी बढ़ गई थी कि एक पुलिस इंस्पेक्टर, सुबोध सिंह की हत्या हो गई थी. योगेश राज ने यहां पर पंचायत चुनावों में वार्ड नंबर 5 से चुनाव लड़ा था और निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी निर्दोषी चौधरी को 2,150 वोटों से हराया. योगेश राज चुनाव लड़ने के दौरान जमानत पर बाहर चल रहे थे.

उन्होंने कहा, 'मैंने बहुत से संगठनों के साथ काम किया है, लेकिन कुछ कामों के लिए आपको राजनीति में घुसना पड़ता है. जैसे कि किसानों की समस्या, विधवाओं के पेंशन की समस्या वगैरह. आप यह सब काम बिना राजनीति में जाए नहीं कर सकते. मैंने वार्ड नंबर 5 से चुनाव लड़ा था और 2,150 वोटों से जीता.'

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बुलंदशहर के सियाना में हुई हिंसा को लेकर योगेश ने कहा कि इस हिंसा पर में दो लोगों की मौत हुई है, लेकिन उनपर मर्डर का आरोप नहीं है. उन्होंने कहा, 'सियाना हिंसा में दो लोग मरे थे, मेरी सहानुभूति उनके परिवारों के साथ हैं, लेकिन मुझपर बस हिंसा का आरोप है, हत्या का आरोप नहीं.' योगेश ने कहा कि अगर लोगों ने इच्छा जताई, तो वो आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी खड़े होंगे. उन्होंने कहा, 'भविष्य में भी अगर लोगों ने रहा तो मैं विधानसभा चुनाव लड़ सकता हूं. एक साल पहले मैं बजरंग दल के साथ था, लेकिन अब मैं किसी संगठन के साथ नहीं हूं.'

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बता दें कि कथित रूप से योगेश राज की ओर से भड़काई गई 3 दिसंबर, 2018 की हिंसा में स्थानीय सियाना पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध सिंह और एक 20 साल के शख्स सुमित सिंह की मौत हो गई थी. यहां पर अवैध रूप से गाय की हत्या को लेकर मॉब वॉयलेंस हुआ था और चिंगरावाठी पुलिस स्टेशन को आग लगा दी गई थी. इस घटना में लगभग 44 लोग जेल भेजे गए थे, जिसमें से 6 लोगों को महीनों बाद जमानत दे दी गई.