सुशांत राजपूत की बहनों के खिलाफ दर्ज FIR पर बोली मुंबई पुलिस- 'इससे सामने आया है अपराध'

शांत सिंह राजपूत की बहनों के खिलाफ रिया चक्रवर्ती की ओर से मुंबई पुलिस में दाखिल कराए गए एफआईआर पर सीबीआई ने कुछ दिनों पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में आपत्ति जताई थी, जिसके बाद सोमवार को मुबंई पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि इस एफआईआर से 'अपराध उजागर' हुआ है.

सुशांत राजपूत की बहनों के खिलाफ दर्ज FIR पर बोली मुंबई पुलिस- 'इससे सामने आया है अपराध'

रिया चक्रवर्ती ने सुशांत की दोनों बहनों के खिलाफ मुंबई पुलिस में FIR दर्ज कराई थी.

मुंबई:

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput Death Case) की बहनों के खिलाफ रिया चक्रवर्ती की ओर से मुंबई पुलिस में दाखिल कराए गए एफआईआर पर सीबीआई ने कुछ दिनों पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में आपत्ति जताई थी, जिसके बाद सोमवार को मुबंई पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि इस एफआईआर से 'अपराध उजागर' हुआ है. सीबीआई ने इस एफआईआर को कानूनी रूप से गलत बताया था.  बांद्रा पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक निखिल कापसे की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि राजपूत की बहनों के खिलाफ एफआईआर दायर करके पुलिस सीबीआई की जांच को ‘प्रभावित करने या पटरी से उतारने' की कोशिश नहीं कर रही.

मुंबई पुलिस ने अपनी इस एफआईआर को लेकर कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल किया है, जिसमें कहा गया है कि वो एफआईआर फाइल करने को लेकर कर्तव्यबद्ध थी. पुलिस ने उन आरोपों को भी खारिज किया है कि वो 34 साल के एक्टर और उनकी बहनों की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रही है. मुंबई पुलिस ने अपने इस हलफनामे में सुशांत की बहनों- प्रियंका सिंह और मीतू सिंह- की ओर से दाखिल की गई याचिका को खारिज करने का आग्रह किया है.

प्रियंका और मीतू ने कोर्ट में याचिका दाखिल करके आग्रह किया था कि उनके खिलाफ पुलिस में दर्ज एफआईआर को कोर्ट निरस्त कर दे. उन्होंने कथित धोखाधड़ी और अपने भाई के लिए दवाइयों का फर्जी पर्चा बनाने को लेकर दर्ज एफआईआर खारिज करने का अनुरोध किया है.

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बता दें कि बांद्रा पुलिस ने चक्रवर्ती से शिकायत मिलने के बाद यहां सितंबर में राजपूत की बहनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. पुलिस ने अपने एफिडेविट में कहा है कि ‘(प्रियंका और मीतू के खिलाफ) एफआईआर पहली सूचना देने वाले (चक्रवर्ती) की ओर से मुहैया कराई गई जानकारी के आधार पर दर्ज की गई, जिसमें अपराध होने का खुलासा हुआ.' हलफनामे में दावा किया गया कि शिकायतकर्ता (चक्रवर्ती) के अनुसार, याचिकाकर्ता ने दिल्ली के एक डॉक्टर की मदद से फर्जी मेडिकल पर्चा भेजा जिसमें राजपूत को घबराहट दूर करने वाली दवाइयां देने की बात की गई थी. पुलिस ने हलफनामे में कहा कि इसकी मदद से डॉक्टर द्वारा राजपूत की असल में जांच किए बिना संभवत: साइकोट्रोपिक सब्सटेंस दिए गए और राजपूत की आत्महत्या में संभवत: इसका भी हाथ था.

हलफनामे में कहा गया, ‘सूचना मुहैया कराने वाला यह विवरण संज्ञेय अपराध का खुलासा करता है, जिसकी जांच की आवश्यकता है. इसलिए मुंबई पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बाध्य थी.' इसमें कहा गया है कि एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार एफआईआर संबंधी सभी प्रासंगिक दस्तावेज सीबीआई को भेजे.

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पुलिस ने सीबीआई के इस रुख का विरोध किया कि उसे उसी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करनी चाहिए, जिसकी जांच केंद्रीय एजेंसी पहले से ही कर रही है. हलफनामे में कहा गया है, ‘सीबीआई जिस मामले की जांच कर रही है, वह बिहार में मृतक के पिता ने दर्ज कराया था.' इसमें कहा गया है, ‘दूसरी ओर, रिया चक्रवर्ती की शिकायत पर मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई शिकायत में सुशांत सिंह राजपूत की बहनों प्रियंका, मीतू और डॉक्टर तरुण कुमार के खिलाफ फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र को लेकर जांच की मांग की गई है.' उसने कहा कि अब यह सीबीआई को फैसला करना है कि वह दोनों एफआईआर की जांच करे या उचित रिपोर्ट दायर करे. जस्टिस एस एस शिंदे और जस्टिस एम एस कार्णिक की बेंच बुधवार को मामले को लेकर आगे की सुनवाई करेगी.

(भाषा से इनपुट के साथ)

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