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This Article is From Apr 06, 2021

गोवा कांग्रेस के बागी विधायकों के अयोग्यता मामले पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

पिछली सुनवाई में गोवा स्पीकर की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि गोवा स्पीकर ने अयोग्यता पर 27 फरवरी को सुनवाई के लिए रखा है. 

गोवा कांग्रेस के बागी विधायकों के अयोग्यता मामले पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर.
नई दिल्ली:

गोवा कांग्रेस (Goa Congress) के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर 20 अप्रैल को विधानसभा स्पीकर (Goa Assembly Speaker) फैसला करेंगे. सुप्रीम कोर्ट को गोवा स्पीकर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस मामले की सुनवाई 21 अप्रैल को करेगा. सुनवाई को दौरान SG तुषार मेहता ने पहले कहा कि स्पीकर 29 अप्रैल को फैसला करेंगे. इस पर CJI एस ए बोबडे ने कहा कि वो उस समय नहीं होंगे, फिर कोई दूसरी बेंच होगी, इसलिए इस पर पहले फैसला हो. बता दें कि पिछली सुनवाई में गोवा स्पीकर की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि गोवा स्पीकर ने अयोग्यता पर 27 फरवरी को सुनवाई के लिए रखा है. विलय पर भी मामला लंबित है. 

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शुरुआत में अदालत ने कहा कि स्पीकर की रिपोर्ट को अदालत के सामने रखा जाए. लेकिन स्पीकर की ओर से कहा गया कि अदालत स्पीकर को निर्देश जारी नहीं कर सकती है. इस मामले की सुनवाई स्पीकर के सुनवाई पूरी करने के बाद हो. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि ये सिर्फ सुनवाई है, निपटारे के लिए नहीं. लेकिन CJI ने कहा कि वो मामले को तभी टालेंगे जब निपटारा भी किया जाए. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ये तारीख सिर्फ कोर्ट को दिखाने के लिए तय की गई है. ये विधायक जुलाई 2019 में भाजपा में शामिल हो गए थे.

दरअसल बीजेपी में शामिल हुए 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए गोवा कांग्रेस चीफ ने शीर्ष अदालत का रुख किया है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि डेढ़ साल बीत चुके हैं और स्पीकर को अयोग्य ठहराने की कांग्रेस की याचिका पर फैसला करना बाकी है. इससे पहले 16 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने गोवा विधानसभा स्पीकर को एक महीने के भीतर कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था.

गोवा के कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर द्वारा दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया था. याचिका में कहा गया है कि अयोग्य ठहराए जाने वाली याचिका अगस्त 2019 से पहले लंबित है, उस पर स्पीकर को शीघ्रता से फैसला करना चाहिए. 

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अतिरिक्त रूप से याचिका में 10 विधायकों को भाजपा विधायकों और मंत्रियों के रूप में कार्य करने से रोकने की मांग भी की गई है. याचिका में कहा गया है कि स्पीकर ने अयोग्यता का फैसला करने के लिए 3 महीने की समयसीमा का उल्लंघन किया है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर विधायक दलबदल के मुद्दे से संबंधित अपने हालिया फैसले में निर्धारित किया है.   जुलाई 2019 में, गोवा में 15 कांग्रेस विधायकों में से दस ने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में विलय कर लिया, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी की ताकत 27 से बढ़कर 40 हो गई.

विपक्षी दल द्वारा 10 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका अगस्त 2019 से विधानसभा स्पीकर के समक्ष लंबित है. चोडणकर की याचिका में कांग्रेस के 10 विधायकों के भाजपा के साथ विलय को चुनौती दी गई है, क्योंकि पार्टी या गोवा इकाई में कोई "विभाजन" नहीं था.

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