अवमानना मामला: SC में कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ सुनवाई पूरी, शुक्रवार को फैसला

अपने खिलाफ अवमानना का केस चलाने की इजाजत देने पर भी कामरा ने ट्वीट किया था और कहा था कि वो न तो ट्वीट हटाएंगे और न ही इसके लिए माफी मांगेंगे.

अवमानना मामला: SC में कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ सुनवाई पूरी, शुक्रवार को फैसला

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कॉमेडियन के खिलाफ एक और ट्वीट के लिए अवमानना का केस चलाने की अनुमति दी थी.

खास बातें

  • कुणाल कामरा के अवमानना केस में SC में सुनवाई पूरी
  • सर्वोच्च अदालत शुक्रवार को सुनाएगी फैसला
  • अटॉर्नी जनरल ने कॉमेडियन के खिलाफ अवमानना का केस चलाने की दी थी इजाजत
नई दिल्ली:

स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) के खिलाफ अवमानना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने सुनवाई पूरी कर ली है और उस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट शुक्रवार को फैसला सुनाएगी. याचिकाकर्ता के वकील निशांत कातनेश्वरकर ने कहा कि कॉमेडियन के पोस्ट ने जनता की नज़र में न्यायपालिका के सम्मान को कम किया है और ये अपमानजनक है. याचिकाकर्ता ने कुणाल के खिलाफ करवाई को लेकर अटॉर्नी जनरल (AG) से अप्रूवल मांगा था और AG ने कहा था कुणाल के ट्वीट अवमानना के दायरे में आते हैं.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कॉमेडियन के खिलाफ एक और ट्वीट के लिए अवमानना का केस चलाने की अनुमति दी थी. 18 नवंबर को किए गए उनके ट्वीट के लिए अवमानना ​​की कार्रवाई के लिए अपनी सहमति प्रदान करते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि यह 'घोर अशिष्ट और निंदनीय' है और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को कमतर करने की कोशिश है. 

कामरा ने इस ट्वीट में CJI के बारे में उंगली के ज़रिए अश्लील और अपमानजनक इशारा किया था. इससे पहले कामरा ने पत्रकार अर्नब गोस्वामी को जमानत दिए जाने के बाद जस्टिस डीवाई  चंद्रचूड़ पर भी अपमानजनक टिप्पणी की थी.

कुणाल कामरा के एक और ट्वीट को लेकर चलेगा अवमानना का केस, अटार्नी जनरल ने दी सहमति

वरिष्ठ कानून अधिकारी ने इस मामले में भी कुणाल कामरा के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की अनुमति दी थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए कहा गया था कि वे "बैड टेस्ट" में थे. अर्नब गोस्वामी को अग्रिम जमानत देने के बाद कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट किए थे. 

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बता देों कि किसी भी शख्स के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई के लिए, कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1975 की धारा 15 के तहत अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहमति आवश्यक है.

वीडियो- सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ट्वीट करके घिरे कुणाल कामरा

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