सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के मामले को लेकर दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि 'सरकार की राय से अलग और असहमति वाली राय रखने वाले विचारों की अभिव्यक्ति को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता.' सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ देशद्रोह कार्यवाही करने के आदेश जारी करने के लिए याचिका दाखिल की गई थी.
कोर्ट में रजत शर्मा नाम के एक शख्स ने याचिका दाखिल की थी और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खिलाफ बयान देने पर फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ देशद्रोह की कार्यवाही करने के आदेश देने की मांग की थी.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
याचिका में कहा गया था कि फारूक अब्दुल्ला ने देश विरोधी और देशद्रोही कार्यवाही की है. उनके खिलाफ ना केवल गृह मंत्रालय को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए बल्कि उनकी संसद सदस्यता भी रद्द की जाए. अगर उनको संसद सदस्य के तौर पर जारी रखा जाता है तो इसका अर्थ है कि भारत में देश-विरोधी गतिविधियों को स्वीकार किया जा रहा है और ये देश की एकता को नुकसान पहुंचाएगा.'
यह भी पढ़ें : कभी अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर अपना कुर्ता फाड़ने वाले पीडीपी सांसद ने की मोदी सरकार की तारीफ....
याचिकाकर्ता ने कहा था कि 'फारूक अब्दुल्ला ने ये बयान दिया था कि वो 370 को फिर से लागू कर देंगे जो कि देशविरोधी है और देशद्रोह के समान है क्योंकि यह संसद ने बहुमत से पास किसा था.' याचिकाकर्ता के मुताबिक, 'फारूक अब्दुल्ला ने लाइव बयान दिया कि अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए वह चीन की मदद लेंगे जो स्पष्ट रूप से देशद्रोह है. चूंकि अब्दुल्ला कश्मीर को चीन और पाकिस्तान को सौंपने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए संसद से उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए और जेल भेजा जाना चाहिए.'
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा के एक बयान पर भरोसा किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अब्दुल्ला जम्मू और कश्मीर के लोगों को गुमराह करने के लिए चीन में शामिल होने के लिए अनुच्छेद 370 की बहाली करना चाहते हैं.'
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को आज खारिज कर दिया और इस जनहित याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने ये जुर्माना याचिकाकर्ता की इस दलील को साबित ना कर पाने पर लगाया कि फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 पर भारत के खिलाफ चीन और पाकिस्तान की मदद मांगी थी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं