यूनिटेक मामला : कंपनी के प्रमोटर्स से मिलीभगत पर तिहाड़ के अफसरों पर गाज, SC ने दिया सस्‍पेंड करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को जेल में कोई भी अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलेगी.

यूनिटेक मामला : कंपनी के प्रमोटर्स से मिलीभगत पर तिहाड़ के अफसरों पर गाज, SC ने दिया सस्‍पेंड करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल के अफसरों के खिलाफ जांच करने के आदेश भी जारी किए हैं (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली :

यूनिटेक के प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा से मिलीभगत करने पर तिहाड़ के अफसरों (Tihar jail officials) पर गाज गिरी है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ( Delhi CP Asthana)की रिपोर्ट में नामित तिहाड़ अफसरों को निलंबित करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों के खिलाफ जांच करने के आदेश भी जारी किए हैं. यूनिटेक के प्रमोटरों को जेल से कामकाज चलाने में मदद करने पर यह कार्रवाई की गई है. दरअसल यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा और अजय चंद्रा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त नाराज़ है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को तुरंत तिहाड़ जेल से मुंबई की ऑर्थर रॉड जेल और तलोजा सेंट्रल जेल में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस मामले में तिहाड़ जेल अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया गया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को जेल में कोई भी अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलेगी. दरअसल, ED ने 5 अप्रैल 16 अगस्त 2021 को दो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी. 16 अगस्त 2021 की स्टेटस रिपोर्ट में ED ने कहा था कि 'जेल परिसर गैर कानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया. गवाहों को प्रभावित करने के लिए तिहाड़ परिसर का इस्तेमाल किया गया. इसमें तिहाड़ जेल के लोग भी शामिल हैं.' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों भाइयों को तत्काल ट्रांसफर किया जाए. दोनों को अलग-अलग रखा जाएगा. 

कोर्ट ने तिहाड़ जेल अधिकारियों को यूनिटेक के निदेशक संजय चंद्रा और अजय चंद्रा के साथ मिलकर जेल मैनुअल का उल्लंघन करने, कार्यवाही को बाधित करने, जांच को पटरी से उतारने के लिए अवैध गतिविधियों में लिप्त होने के लिए भी फटकार लगाई. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने जेलकर्मियों के खिलाफ कुछ आरोप लगाते हुए ईडी डायरेक्टर के पत्र के दस दिन बाद भी कोई कार्रवाई ना करने पर दिल्ली पुलिस से नाराजगी जाहिर की. अदालत ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को जेल की भूमिका की जांच के आदेश दिए थे.

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