
नई दिल्ली:
उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री ने शीर्ष अदालत को बताया है कि वकालत करने वाले किसी वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता का पद देना अदालत के प्रशासनिक पक्ष द्वारा किया गया फैसला है और इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने एक जनहित याचिका पर हलफनामा दायर करके यह बात कही। इस याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता का पद प्रदान करने के मानदंड और तरीके पर सवाल उठाए थे।
रजिस्ट्री ने कहा कि प्रक्रिया निष्पक्ष है और पेशेवर क्षमता, विधि में विशेषज्ञता एवं बार के अनुभव सहित विभिन्न पहलुओं पर आधारित है।
रजिस्ट्री ने हलफनामे के जरिये कहा कि किसी वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता का पद देने या नहीं देने का इस अदालत का फैसला इस अदालत के प्रशासनिक पक्ष द्वारा किया गया फैसला है और इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रजिस्ट्री ने कहा कि प्रक्रिया निष्पक्ष है और पेशेवर क्षमता, विधि में विशेषज्ञता एवं बार के अनुभव सहित विभिन्न पहलुओं पर आधारित है।
रजिस्ट्री ने हलफनामे के जरिये कहा कि किसी वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता का पद देने या नहीं देने का इस अदालत का फैसला इस अदालत के प्रशासनिक पक्ष द्वारा किया गया फैसला है और इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती।
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