
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को यौन शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद इस एक सप्ताह में दूसरी बार सफाई देनी पड़ी है। इससे पहले कॉन्डम को लेकर दिए गए उनके बयान पर भी विवाद हुआ था।
हर्षवर्धन ने स्कूलों में यौन शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के किसी भी प्रस्ताव से इनकार करते हुए कहा कि यौन शिक्षा जरूरी है, लेकिन अश्लीलता के बिना।
फिलहाल अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर गए मंत्री ने कहा, 'मैं एक मेडिकल प्रोफेशनल हूं जिसने तर्कवाद को अपनाया है और मैं तहे दिल से ऐसी शिक्षा का समर्थन करूंगा जो वैज्ञानिक और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य हो।' उन्होंने कहा कि सामान्य संवेदना को आघात पहुंचाने वाले किसी भी चीज को खारिज किया जाना चाहिए और इसकी जगह परस्पर सहमति से स्वीकृति प्राप्त सीखने की प्रक्रिया को शामिल किया जाना चाहिए।
इससे पहले हर्षवर्धन ने अपनी वेबसाइट पर विजन डॉक्युमेंट में कहा था कि स्कूलों में यौन शिक्षा पर प्रतिबंध लगना चाहिए और योग को अनिवार्य करना चाहिए।
डॉ. हर्षवर्धन के इस बयान पर खूब बवाल हुआ। कांग्रेस ने हर्षवर्धन की आलोचना करते हुए कहा कि यह पुरानी सोच है। कांग्रेस के प्रवक्त रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि अश्लील यौन शिक्षा से डॉ. हर्षवर्धन का क्या अर्थ है। आखिर कौन सी स्कूल यह करती है?'
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