नई दिल्ली:
ज़िंदगी के चालीसवें साल में क़दम रखते ही लिट्ल−मास्टर के नाम के साथ एक नई भूमिका जुड़ने वाली है। सौ शतकों के मालिक सचिन अब राज्यसभा के सदस्य बनने वाले हैं और इस नई कहानी का पहला पन्ना सोमवार को दिल्ली में लिखा जाएगा।
वह पहले ऐसे क्रिकेटर होंगे जिन्हें यह उपलब्धि मिल रही है। एक क्रिकेटर के तौर पर उनका जो सफर 23 साल पहले शुरू हुआ था वह आज भी मास्टर ब्लास्टर के तौर पर जारी है।
वर्ल्ड कप की जीत और शतकों के शतक के बाद क्रिकेट के मैदान में उनकी हर इच्छा मानो पूरी हो गई है। क्रिकेट के मैदान में उनके रिकॉर्ड का ग्राफ ज्यों-ज्यों बढ़ता गया, दूसरी जगहों पर भी उनका कद बढ़ता गया।
भारतीय वायुसेना ने उन्हें अपना ग्रुप कैप्टन बनाया, उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी, और सचिन को सम्मानित करने के लिए सरकार ने भारत रत्न देने के तौर तरीकों में बदलाव भी किया। लेकिन, भारत रत्न से पहले उन्हें एक और पड़ाव से गुजरना होगा, और वह पड़ाव होगा राज्यसभा के सांसद का।
वह पहले ऐसे क्रिकेटर होंगे जिन्हें यह उपलब्धि मिल रही है। एक क्रिकेटर के तौर पर उनका जो सफर 23 साल पहले शुरू हुआ था वह आज भी मास्टर ब्लास्टर के तौर पर जारी है।
वर्ल्ड कप की जीत और शतकों के शतक के बाद क्रिकेट के मैदान में उनकी हर इच्छा मानो पूरी हो गई है। क्रिकेट के मैदान में उनके रिकॉर्ड का ग्राफ ज्यों-ज्यों बढ़ता गया, दूसरी जगहों पर भी उनका कद बढ़ता गया।
भारतीय वायुसेना ने उन्हें अपना ग्रुप कैप्टन बनाया, उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी, और सचिन को सम्मानित करने के लिए सरकार ने भारत रत्न देने के तौर तरीकों में बदलाव भी किया। लेकिन, भारत रत्न से पहले उन्हें एक और पड़ाव से गुजरना होगा, और वह पड़ाव होगा राज्यसभा के सांसद का।
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