Sachin Pilot Vs Ashok Gehlot: सुप्रीम कोर्ट के अतीत में दिए इन फैसलों से किसे मिलेगी राहत?

Rajasthan Crisis: राजस्थान के सियासी घमासान में सचिन पायलट खेमे को राहत मिलेगी या नहीं इसको समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अतीत में दिए इन फैसलों को देखना चाहिए.

Sachin Pilot Vs Ashok Gehlot: सुप्रीम कोर्ट के अतीत में दिए इन फैसलों से किसे मिलेगी राहत?

Rajasthan Crisis: इन फैसलों को भी आधार बना रहे हैं स्पीकर

नई दिल्ली:

Rajasthan Crisis: राजस्थान का सियासी घमासान अब कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है. राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष ने सचिन पायलट (Sachin Pilot) समेत बागी विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि उन्हें क्यों अयोग्य नहीं ठहराया जाना चाहिए. इस नोटिस के खिलाफ विधायकों ने हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) का रुख किया. राजस्थान उच्च न्यायालय में आज उनकी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है. इस मामले में सचिन पायलट खेमे को राहत मिलेगी या नहीं इसको समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अतीत में दिए इन फैसलों को देखना चाहिए. 

रवि एस नाइक बनाम भारत संघ मामला
सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में रवि एस नाइक बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट किया था कि किसी सांसद या विधायक को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता को आकर्षित करने के लिए औपचारिक रूप से अपनी पार्टी से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है. 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 (1) (A) की व्याख्या करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि-स्वच्छा से अपनी सदस्यता छोड़ दी गई 'इस्तीफे' का पर्याय नहीं है. यहां तक कि एक सदस्यता के लिए औपचारिक इस्तीफे की अनुपस्थिति में भी. एक सदस्य के आचरण को देखकर, कि उसने स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ दिया है, जिसके पास वह है. 


2003 बसपा विधायकों का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2007 में राजेंद्र सिंह राणा बनाम स्वामी प्रसाद मौर्या और अन्य लोगों के मामले में कहा था कि राज्यपाल को पत्र देने का अनुरोध करने पर दूसरे पक्ष के नेता को सरकार बनाने का अनुरोध करना पिछली पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के समान होगा. बता दें कि यह मामला 13 बसपा विधायकों से संबंधित था जिन्होंने 2003 में यूपी में सरकार बनाने के मुलायम सिंह के दावे का समर्थन किया था. 

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