
किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा है कि जब संसद गूंगी-बहरी हो जाती है तो सड़क की आवाज सुनी जाती है. उन्होंने तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के करीब एक वर्ष से चल रहे आंदोलन के संदर्भ में यह बात कही. भारतीय किसान यूनियन नेता टिकैत ने NDTV के साथ बातचीत में कहा कि हम जो आंदोलन कर रहे, यह वास्तव में जनता का आंदोलन है. घोषणा पत्र में नरेंद्र मोदी सरकार ने जो बात कही, उसके अलग काम हो रहे हैं. किसान नेता ने कहा कि सब जमीन बेचने में लगे हैं, यह बात घोषणा पत्र में तो नहीं कही गई थी. भारत पेट्रोलियम को बेच रहे हैं,बीएसएएनल को बेचेंगे. भारतीय रेलवे में चादर और कंबल नहीं दिए जा रहे लेकिन स्पेशन का नाम देकर किराया बढ़ाया जा रहा. देश के करोड़ों नौजवान दिल्ली की तरफ देख रहा है जिनसे जॉब का वायदा किया गया था.
27 सितंबर को आहूत भारत बंद के बारे में टिकैत ने कहा, इस बारे में हम सबसे बातचीत कर रहे है. बंद बिल्कुल होगा. हरियाणा के एक बीजेपी नेता के इस बयान कि किसान आंदोलन के कारण ड्रग्स की समस्या बढ़ गई है, टिकैत ने कहा कि सारे के सारे लोग यह बात कर रहे. जब कोरोना काल में देश बंद था तो पुलिस शराब बंटवाती थी. इस सवाल पर कि गाजियाबाद से रोजाना दिल्ली आने वाले लोग चाहते हैं कि हाईवे की एक लेन को खोल दिए जाए,टिकैत ने कहा कि हमारी यह लड़ाई उन (आम) लोगों के लिए ही है. जो आलू हम डेढ़ रुपये किलो में बेचते हैं, वह उन्हें कितने रुपये में मिलता है, जो दूध हम 22 रुपये लीटर बेचते हैं, आम लोगों को वह कितने रेट में मिलता है. उन्होंने इस मामले में बाजरे का भी उदाहरण दिया. किसान नेता टिकैत ने कहा, 'रास्ता हमने बंद नहीं कर रखा है, पुलिस ने बंद कर रखा है. हम तो कह रहे हैं कि हमें दिल्ली जाने दो. आज स्थिति यह है कि कैमरा-कलम पर बंदूक का पहरा है.'
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