
राज्यसभा के सात जुलाई से शुरू हुए 232वें सत्र को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान हुई कुल 27 बैठकों में आम बजट और रेल बजट पर चर्चा कर उन्हें लोकसभा को लौटाए जाने के अलावा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग बनाने के मकसद से दो ऐतिहासिक विधेयकों को पारित किया गया।
सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में सभापति हामिद अंसारी ने कहा कि इस सत्र में सदन में 140 घंटे से अधिक कामकाज हुआ। उन्होंने कहा कि विभिन्न अवसरों पर अड़चनों के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई विशेषकर प्रश्नकाल। इससे सदस्यों ने कार्यपालिका से जवाब मांगने का अवसर गंवा दिया।
अंसारी ने सभी सदस्यों को स्वाधीनता दिवस की शुभकामानाएं दी। सदन में राष्ट्रगीत की धुन बजाए जाने के बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण 34 घंटे की कार्यवाही बाधित हुई। सत्र के दौरान आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओड़िशा, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश से निर्वाचित या पुनर्निवाचित होकर आए 17 सदस्यों ने शपथ ली।
इस सत्र के दौरान आम बजट, रेलवे बजट तथा दिल्ली के बजट को चर्चा के बाद लोकसभा को लौटा दिया गया। सदन में बिजली, गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हुई। सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयकों को पारित किया गया या लोकसभा को लौटाया गया। इनमें आंध्रप्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान विधेयक, प्रतिभूति कानून संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग और इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शामिल हैं।
सत्र के दौरान, बीमा विधेयक को राज्यसभा की 15 सदस्यीय प्रवर समिति के पास भेजा गया।
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