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This Article is From Nov 27, 2016

रेलवे और आईआरसीटीसी ने ट्रांसजेंडर को 'तीसरे लिंग' के रूप में शामिल किया

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रेलवे और आईआरसीटीसी ने ट्रांसजेंडर को 'तीसरे लिंग' के रूप में शामिल किया
प्रतीकात्मक तस्वीर
  • टिकट रिजर्वेशन फॉर्म में 'ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग' के तौर पर शामिल किया
  • एक अधिवक्ता जमशेद अंसारी के आवेदन पर यह निर्णय लिया गया
  • यह ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट बुकिंग के लिए उपलब्ध होगी
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी ने टिकट आरक्षण और टिकट रद्द कराने वाले फॉर्म में महिला एवं पुरुष के साथ-साथ 'ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग' के तौर पर शामिल कर लिया है. एक अधिवक्ता के आवेदन पर यह निर्णय लिया गया. टिकट आरक्षण और रद्द कराने के अलावा यह सुविधा ऑनलाइन और ऑफलाइन भी उपलब्ध होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी में दिल्ली के एक अधिवक्ता से अपनी याचिका पर कार्रवाई के लिए रेलवे मंत्रालय से संपर्क करने को कहा था. मंत्रालय ने शीर्ष न्यायालय के अप्रैल-2014 के निर्देशों के संदर्भ देते हुये बताया कि हिजड़ा, किन्नर और बाइनरी के अधिकारों की रक्षा के लिए अब उन्हें तीसरे लिंग के रूप में माना जाएगा.

गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में संविधान के तृतीय भाग और संसद के द्वारा बनाए गए कानून के तहत हिजड़ा और किन्नर के साथ-साथ बाइनरी के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें तीसरे लिंग के रूप में मान्यता देने का निर्देश दिया था. परिपत्र में कहा गया, 'निर्देशों के तहत टिकट आरक्षण, रद्द कराने के फार्म में महिला और पुरुष के साथ-साथ ट्रांसजेंडर का विकल्प भी शामिल करने का निर्णय किया गया है. प्रणाली में यह सूचना दर्ज कर ली जाएगी, जबकि उन्हें पूरी कीमत पर टिकट जारी किया जाएगा.'

इससे पहले अधिवक्ता जमशेद अंसारी ने हाईकोर्ट में दायर अपनी जनहित याचिका में इसे आईआरसीटीसी द्वारा संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन बताया था. उन्होंने भारतीय रेलवे से शीर्ष न्यायालय के उस निर्णय के अनुपालन की मांग की थी, जिसमें न्यायालय ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता प्रदान करने का निर्देश दिया था. इसके साथ ही उन्हें सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के हिसाब से रियायत देने की मांग भी की थी.

इसके अलावा उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय की 'देखभाल एवं अधिकारों की रक्षा' के लिए सभी ट्रेनों में विशेष बोगियां एवं आरक्षित सीटें लगाने की भी मांग की थी. मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेलवे मंत्रालय से याचिका का संज्ञान लेने को कहा था.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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