
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ( फाइल फोटो )
अहमदाबाद:
गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए धुआंधार प्रचार शुरू कर चुके कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ताबड़तोड़ बयानों से हैरान कर दिया है. बीजेपी के प्रवक्ताओं की फौज भी अभी तक उनके बयानों की काट ढूंढ नहीं पाई है और सोशल मीडिया पर भी राहुल के बयान छाए हैं. हालांकि अभी तक पीएम मोदी की ओर से राहुल के इन बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है और निश्चित तौर पर चुनावी सभाओं में इन बयानों पर देंगे. इससे पहले चुनाव प्रचार चरम पर पहुंचता कि राहुल गांधी ने एक ऐसा बयान दे डाला जिस पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या राहुल गांधी ने अपने ही पाले में गोल मार दिया है. दरअसल कांग्रेस उपाध्यक्ष ने गुजरात में अपने चुनाव अभियान के दूसरे दिन यहां विद्यार्थियों की एक सभा में कहा ' भाजपा की सोच है कि जबतक महिलाएं शांत हैं, तब तक वे अच्छी हैं लेकिन जब वे बोलने लगती हैं तब वह (बीजेपी) उनका मुंह बंद करने की कोशिश करती है.'
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इसके बाद उन्होंने व्यंग्यपूर्ण अंदाज में कहा, 'उनका (बीजेपी) संगठन आरएसएस है. आरएसएस में कितनी महिलाएं हैं. क्या आपने कभी किसी महिला को शाखा में निक्कर पहने देखा है?. इस बयान पर राहुल गांधी का सोशल मीडिया और गुजरात में आरएसएस और बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया. इतना ही नहीं राहुल के हाल ही में दिए गए बयानों की काट ढूंढने में जुटे बीजेपी प्रवक्ता भी आक्रामक हो गए. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल के इस बयान को ‘‘अभद्रता’’ करार दिया. ईरानी ने अमेठी में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर राहुल जी को लगता है कि भारत में निक्कर पहनना सशक्तिकरण है तो एक महिला के रूप में मैं इसका विरोध करती हूं.’’ उन्होंने कहा, संघ से जुड़ी हमारी बहनों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई.’’
वीडियो : आदिवासियों के बीच थिरकते राहुल गांधी. अन्य Video देखने के लिए क्लिक करें
वहीं आरएसएस की ओर से भी इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई गई. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने जवाब दिया और कहा कि राहुल की स्क्रिप्ट लिखने वाले समझदार नहीं हैं. यह तो ठीक वैसी बात हुई, पुरुष हॉकी मैच में महिला खिलाड़ी को देखने जैसी. वैद्य ने कहा है कि खेलों में महिला और पुरुष एक साथ मुक़ाबला नहीं करते हैं. संघ ने तय किया था कि वह सिर्फ पुरुषों के बीच काम करेगा, यह तय करने का अधिकार संघ को है, अगर उन्हें महिलाएं देखना है तो महिला हॉकी मैच देखने जाएं. वहीं अब माना जा रहा है कि बीजेपी राहुल के इस बयान को गुजरात में बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है. इसके लिए अब वह आरएसएस और पार्टी से जुड़ी महिलाओं को आगे करेगी.
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इसके बाद उन्होंने व्यंग्यपूर्ण अंदाज में कहा, 'उनका (बीजेपी) संगठन आरएसएस है. आरएसएस में कितनी महिलाएं हैं. क्या आपने कभी किसी महिला को शाखा में निक्कर पहने देखा है?. इस बयान पर राहुल गांधी का सोशल मीडिया और गुजरात में आरएसएस और बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया. इतना ही नहीं राहुल के हाल ही में दिए गए बयानों की काट ढूंढने में जुटे बीजेपी प्रवक्ता भी आक्रामक हो गए. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल के इस बयान को ‘‘अभद्रता’’ करार दिया. ईरानी ने अमेठी में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर राहुल जी को लगता है कि भारत में निक्कर पहनना सशक्तिकरण है तो एक महिला के रूप में मैं इसका विरोध करती हूं.’’ उन्होंने कहा, संघ से जुड़ी हमारी बहनों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई.’’
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वहीं आरएसएस की ओर से भी इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई गई. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने जवाब दिया और कहा कि राहुल की स्क्रिप्ट लिखने वाले समझदार नहीं हैं. यह तो ठीक वैसी बात हुई, पुरुष हॉकी मैच में महिला खिलाड़ी को देखने जैसी. वैद्य ने कहा है कि खेलों में महिला और पुरुष एक साथ मुक़ाबला नहीं करते हैं. संघ ने तय किया था कि वह सिर्फ पुरुषों के बीच काम करेगा, यह तय करने का अधिकार संघ को है, अगर उन्हें महिलाएं देखना है तो महिला हॉकी मैच देखने जाएं. वहीं अब माना जा रहा है कि बीजेपी राहुल के इस बयान को गुजरात में बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है. इसके लिए अब वह आरएसएस और पार्टी से जुड़ी महिलाओं को आगे करेगी.
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