मुम्बई:
मुम्बई में 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराने के लगभग चार साल बाद भारत ने शनिवार को महाराष्ट्र और गुजरात के समुद्र तटों पर चौकसी के लिए अपना चौकसी राडार नेटवर्क शुरू किया। यह नेटवर्क सुरक्षा में उस चूक की भरपाई करेगा जिस कारण मुम्बई में 26/11 के हमले हुए थे।
रक्षा मंत्री एके एंटनी ने 7,500 किलोमीटर में फैले देश के समुद्री तटों के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुम्बई और पोरबंदर में तटीय निगरानी प्रणाली (स्थिर संवेदक श्रृंखला) का उद्घाटन किया। उन्होंने भरोसा दिया कि 2013 के मध्य तक देश के सभी समुद्री तटों, मुख्यभूमि और द्वीपों दोनों पर लगातार तटीय चौकसी परियोजना पूरी कर ली जाएगी।
यह पहला तटीय चौकसी नेटवर्क है जिसमें स्थिर राडार और तटीय सीमा से लगते द्वीपीय क्षेत्र सहित 84 सुदूर स्थलों पर विद्युत संचालित संवेदक लगे हुए हैं। यह नेटवर्क समुद्र में चलते हुए संदिग्ध जहाजों व नौकाओं की पहचान करने में मददगार साबित होगा।
उद्घाटन के बाद एंटनी ने कहा कि भारतीय तटीय क्षेत्र की निगरानी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। तटीय निगरानी नेटवर्क की स्थापना से तट रक्षकों की इलेक्ट्रॉनिक चौकसी क्षमता बढ़ेगी।
एंटनी ने यह भी कहा कि देश का पश्चिमी तटीय क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। इसलिए महाराष्ट्र और गुजरात में इस नेटवर्क की स्थापना सबसे पहले करने का फैसला लिया गया।
इस नेटवर्क के संवेदकों का संचालन राडार स्टेशनों से किया जाएगा। ये राडार स्टेशन तारापुर, कोरलाई, टोलकेश्वर और देवगाद में तटरक्षक स्थिर संवेदक परियोजना के हिस्से के रूप में स्थापित किए गए हैं।
यह नेटवर्क तटीय सुरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है जो समुद्री यातायात की पहचान और निगरानी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के पहले चरण में नेटवर्क का विस्तार 46 स्थलों पर किया जाएगा और ध्यान रखा जाएगा कि इसके माध्यम से सही वक्त पर 25 समुद्री मील तक चौकसी हो सके।
मुम्बई और पोरबंदर में चौकसी रडार नेटवर्क के उद्घाटन अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव शेखर अग्रवाल, भारतीय तटरक्षा महानिदेशक वाइस एडमिरल एम.पी. मुरलीधरन और बीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिल कुमार भी रक्षा मंत्री एंटनी के साथ थे।
रक्षा मंत्री एके एंटनी ने 7,500 किलोमीटर में फैले देश के समुद्री तटों के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुम्बई और पोरबंदर में तटीय निगरानी प्रणाली (स्थिर संवेदक श्रृंखला) का उद्घाटन किया। उन्होंने भरोसा दिया कि 2013 के मध्य तक देश के सभी समुद्री तटों, मुख्यभूमि और द्वीपों दोनों पर लगातार तटीय चौकसी परियोजना पूरी कर ली जाएगी।
यह पहला तटीय चौकसी नेटवर्क है जिसमें स्थिर राडार और तटीय सीमा से लगते द्वीपीय क्षेत्र सहित 84 सुदूर स्थलों पर विद्युत संचालित संवेदक लगे हुए हैं। यह नेटवर्क समुद्र में चलते हुए संदिग्ध जहाजों व नौकाओं की पहचान करने में मददगार साबित होगा।
उद्घाटन के बाद एंटनी ने कहा कि भारतीय तटीय क्षेत्र की निगरानी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। तटीय निगरानी नेटवर्क की स्थापना से तट रक्षकों की इलेक्ट्रॉनिक चौकसी क्षमता बढ़ेगी।
एंटनी ने यह भी कहा कि देश का पश्चिमी तटीय क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। इसलिए महाराष्ट्र और गुजरात में इस नेटवर्क की स्थापना सबसे पहले करने का फैसला लिया गया।
इस नेटवर्क के संवेदकों का संचालन राडार स्टेशनों से किया जाएगा। ये राडार स्टेशन तारापुर, कोरलाई, टोलकेश्वर और देवगाद में तटरक्षक स्थिर संवेदक परियोजना के हिस्से के रूप में स्थापित किए गए हैं।
यह नेटवर्क तटीय सुरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है जो समुद्री यातायात की पहचान और निगरानी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के पहले चरण में नेटवर्क का विस्तार 46 स्थलों पर किया जाएगा और ध्यान रखा जाएगा कि इसके माध्यम से सही वक्त पर 25 समुद्री मील तक चौकसी हो सके।
मुम्बई और पोरबंदर में चौकसी रडार नेटवर्क के उद्घाटन अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव शेखर अग्रवाल, भारतीय तटरक्षा महानिदेशक वाइस एडमिरल एम.पी. मुरलीधरन और बीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिल कुमार भी रक्षा मंत्री एंटनी के साथ थे।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं