
प्रतीकात्मक फोटो
लखनऊ:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इन दिनों लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों में छाई स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक धुंध और प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर नाराजगी जाहिर करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को स्थिति से निपटने के लिए फौरी कदम उठाने के आदेश दिए हैं.
उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कल लखनऊ समेत प्रदेश के कई इलाकों में छाई धुंध के मामले में दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सम्बन्धित विभागों को समुचित निर्देश देने के आदेश देते हुए यह भी कहा कि वह सूबे के अनेक हिस्सों में छाई धुंध से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताएं.
न्यायालय ने कहा कि सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह इस अभूतपूर्व स्थिति से उबरने के लिए फौरी उपचारात्मक कदम उठाए.
उच्च न्यायालय ने यह आदेश ऐसे वक्त दिया है जब प्रदेश के अनेक हिस्सों में सुबह-शाम खासी धुंध छा जाने का सिलसिला जारी है. मालूम हो कि लखनऊ समेत प्रदेश के अनेक हिस्सों में पिछले चार दिनों से तबीयत खराब कर देने वाली धुंध छाई है. इसकी वजह से लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश महसूस हो रही है. प्रदेश में जगह-जगह फसल के ठूंठ (अवशेष जड़ें) और गोबर जलाने से फैले धुएं ने स्थिति और खराब कर दी है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है.
मौसम विभाग के मुताबिक शीतकाल में हवा नहीं चलने से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है और वातावरण में धुंध लंबे समय तक जमी रहती है. ठंड के दिनों में जब तापमान सामान्य से कम होता है तो हवा में तैरते महीन धूल कण जम से जाते हैं. सरकार ने वायु प्रदूषण फैलाने वाले स्टोन क्रेशर तथा बहुमंजिला निर्माणाधीन इमारतों का काम दो दिन के लिए बंद करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि किसी भी स्थान पर कूड़ा न जलाया जाए.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में छाई धुंध को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इस धुंध के लिए जिम्मेदार कारणों का पता लगाकर इसके निदान के उपाय करें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कूड़े के निस्तारण की समुचित व्यवस्था की जाए और उसे जलाने से परहेज किया जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वाहन तथा जेनरेटर प्रदूषण के निर्धारित मानकों के भीतर चलें. खेतों में फसलों के अवशेष का निस्तारण ऐसे हो कि प्रदूषण का स्तर न बढ़ने पाए.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कल लखनऊ समेत प्रदेश के कई इलाकों में छाई धुंध के मामले में दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सम्बन्धित विभागों को समुचित निर्देश देने के आदेश देते हुए यह भी कहा कि वह सूबे के अनेक हिस्सों में छाई धुंध से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताएं.
न्यायालय ने कहा कि सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह इस अभूतपूर्व स्थिति से उबरने के लिए फौरी उपचारात्मक कदम उठाए.
उच्च न्यायालय ने यह आदेश ऐसे वक्त दिया है जब प्रदेश के अनेक हिस्सों में सुबह-शाम खासी धुंध छा जाने का सिलसिला जारी है. मालूम हो कि लखनऊ समेत प्रदेश के अनेक हिस्सों में पिछले चार दिनों से तबीयत खराब कर देने वाली धुंध छाई है. इसकी वजह से लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश महसूस हो रही है. प्रदेश में जगह-जगह फसल के ठूंठ (अवशेष जड़ें) और गोबर जलाने से फैले धुएं ने स्थिति और खराब कर दी है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है.
मौसम विभाग के मुताबिक शीतकाल में हवा नहीं चलने से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है और वातावरण में धुंध लंबे समय तक जमी रहती है. ठंड के दिनों में जब तापमान सामान्य से कम होता है तो हवा में तैरते महीन धूल कण जम से जाते हैं. सरकार ने वायु प्रदूषण फैलाने वाले स्टोन क्रेशर तथा बहुमंजिला निर्माणाधीन इमारतों का काम दो दिन के लिए बंद करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि किसी भी स्थान पर कूड़ा न जलाया जाए.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में छाई धुंध को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इस धुंध के लिए जिम्मेदार कारणों का पता लगाकर इसके निदान के उपाय करें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कूड़े के निस्तारण की समुचित व्यवस्था की जाए और उसे जलाने से परहेज किया जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वाहन तथा जेनरेटर प्रदूषण के निर्धारित मानकों के भीतर चलें. खेतों में फसलों के अवशेष का निस्तारण ऐसे हो कि प्रदूषण का स्तर न बढ़ने पाए.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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